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इंदौर कर्मचारी संघ प्रदर्शन: कलेक्टर कार्यालय पर ज्ञापन

इंदौर कर्मचारी संघ प्रदर्शन में लंबित मांगों पर सरकार से जवाब तलब

इंदौर कर्मचारी संघ प्रदर्शन के तहत मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। इंदौर कर्मचारी संघ प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

दरअसल संघ का कहना है कि पूर्व में की गई घोषणाओं के बावजूद उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं कर्मचारियों ने लंबित मुद्दों के शीघ्र निराकरण की मांग दोहराई।


इंदौर कर्मचारी संघ प्रदर्शन: ये हैं प्रमुख मांगें

इंदौर कर्मचारी संघ प्रदर्शन में कर्मचारियों ने कई अहम मांगें उठाईं। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि केंद्र के समान महंगाई भत्ता नियत तिथि से दिया जाए।

इसके अलावा राज्य शिक्षा सेवा में नियुक्त अध्यापक संवर्ग की सेवावधि प्रथम नियुक्ति तिथि से मान्य करने की मांग की गई।

प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • केंद्र के समान डीए प्रदान किया जाए

  • ग्रेज्यूटी, अर्जित अवकाश और पेंशन में सेवावधि मान्य हो

  • केशलेस स्वास्थ्य बीमा शीघ्र लागू किया जाए

  • वेतन विसंगति दूर करने के लिए वेतन आयोग का गठन

  • तीसरी संतान संबंधी कार्यवाही रोकी जाए

  • नई भर्ती में पूर्ववत 2 वर्ष की परीवीक्षा अवधि

  • नवीन पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन बहाल

इन मांगों को लेकर कर्मचारियों ने सरकार से ठोस निर्णय की अपेक्षा जताई।


वेतन और पेंशन मुद्दों पर जोर

इंदौर कर्मचारी संघ प्रदर्शन के दौरान वेतन विसंगति, ग्रेड पे और पदनाम परिवर्तन का मुद्दा प्रमुख रहा।

संघ ने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार 70/80/90 प्रतिशत वेतन एरियर नियुक्ति तिथि से दिया जाए। साथ ही नई पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन बहाल की जाए।

  • वेतन आयोग गठन की मांग

  • एरियर भुगतान की मांग

  • पुरानी पेंशन बहाली

अब सवाल यह है कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाएगी।

इससे पहले… कर्मचारी संगठनों ने भोपाल में भी प्रदर्शन किया था।
इस मामले में विस्तृत अपडेट देखें… हमारे राज्य समाचार सेक्शन में।


संघर्ष जारी रखने की चेतावनी

संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान देवेंद्र रघुवंशी और राजकुमारी गोयल ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।

दूसरी ओर प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर उचित स्तर पर विचार का आश्वासन दिया है।

स्रोत: मध्यप्रदेश शासन आधिकारिक वेबसाइट

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