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महाकाल में आकार लेगा 1000 साल पुराना मंदिर, 37 फीट ऊंचा भव्य मंदिर बनेगा, 65 लाख रुपए आएगी लागत

Ujjain Mahakal Excavation 
Ujjain Mahakal Excavation 

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उज्जैन में महांकालेश्वर मंदिर परिसर में खुदाई के दौरान मिले 1000 साल पुराने मंदिर के अवशेषों से फिर मंदिर बनाया जाएगा। जिसकी ऊंचाई 37 फीट होगी और इसमें 65 लाख रुपए की लागत आएगी। यह मंदिर एक साल के अंदर यह बनकर तैयार हो जाएगा। जिसका पूरा काम पुरातत्व विशेषज्ञों की देखरेख में कराया जाएगा।

Ujjain Mahakal Excavation 
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आपको बता दें कि, मई 2020 में महाकाल मंदिर विस्तारीकरण के पहले चरण की खुदाई चल रही थी। मंदिर के अगले हिस्से में 25 से 30 फीट खुदाई के बाद प्राचीन मंदिर का ढांचा दिखा था। यहां आधार भाग, प्राचीन शिवलिंग, नंदी, गणेश, माँ चामुंडा और शार्दुल की मूर्तियां मिली थीं। इसके बाद खुदाई का काम रोक दिया गया था। पुरातत्व विशेषज्ञों ने इसे परमारकालीन मंदिर बताया था।

फिर एक्सपर्ट्स की निगरानी में हुई थी खुदाई –

पुरातत्व विभाग के तत्कालीन आयुक्त शिव शेखर शुक्ला ने पुरातत्वविद् डाॅ. रमेश यादव के नेतृत्व में 4 सदस्यीय दल को वहां पर भेजा था। टीम को लीड कर रहे पुरातत्व अधिकारी डॉ. रमेश यादव ने कहा था कि, “11वीं-12वीं शताब्दी का मंदिर नीचे दबा है, जो कि उत्तर वाले भाग में है। आयुक्त ने मंदिर के गौरवशाली इतिहास को संरक्षित करने के लिए पुरातत्व विभाग की निगरानी में खुदाई का निर्णय लिया और दल ने विभाग को इसकी रिपोर्ट भी सौंपी थी।”

Ujjain Mahakal Excavation 
Ujjain Mahakal Excavation

सभी हिस्सों को जोड़कर बनाएंगे मंदिर –

एक्सपर्ट्स की देखरेख में यहां मिले स्तंभ, कुंभ भाग, आमलक आदि के अवशेषों का वर्गीकरण कर नंबरिंग की है, जिससे निर्माण के दौरान जो भाग जहां का है, वहीं स्थापित किया जा सके। पुरातत्व विभाग अब आधार भाग से शिखर तक के हिस्सों को जोड़कर प्राचीन स्वरूप में ही मंदिर निर्माण का कार्य शुरू करेगा।

ऐसे किया जाएगा मंदिर निर्माण –

पुरातत्वविद् डॉ. रमेश यादव ने बताया कि – “बारिश का सीजन खत्म होने के बाद मंदिर के आधार स्तंभ को दोबारा खोला जाएगा। इसके बाद नींव से मंदिर निर्माण का काम शुरू किया जाएगा और जिसमे खुदाई में निकले पत्थरों का ही उपयोग किया जाएगा। मंदिर की नींव तक ले जाकर स्ट्रक्चर की सफाई कर पुन: निर्माण शुरू किया जाएगा।

Ujjain Mahakal Excavation 
Ujjain Mahakal Excavation

मंदिर निर्माण का कार्य पत्थरों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। जो पार्ट्स कम रहेंगे, उन्हें बनाने में समय लगेगा। जरूरत के मुताबिक पत्थर मंगवाए जाएंगे। अनुमान है कि, “यहां 90 प्रतिशत पत्थर उपलब्ध हैं। ऐसे में 6 महीने से 1 साल में कार्य पूरा हो जाएगा। करीब 37 फीट की ऊंचाई वाला मंदिर पौराणिक स्वरूप में आकार लेगा और निर्माण के बाद मंदिर समिति को ही सौंप दिया जाएगा।”

‘सिर दल व द्वार शाखा से तय होगा, कौन सा मंदिर है’ – 

डॉ. यादव के मुताबिक – “प्राचीन मंदिर किस देवता का है, इसकी पहचान के लिए सिद्धांत है। मंदिर के “सिर दल व द्वार शाखा” पर स्थित देवता के चिन्ह से पता चलता है कि, मंदिर किस देवता का है। जैसे- सिर दल पर गणेश जी है, तो यह शिव मंदिर होगा और यदि सिर दल पर गरुड़ जी हैं, तो यह विष्णु मंदिर होगा। मंदिर के आधार भाग को देखने पर स्पष्ट हो जाएगा कि, यह प्राचीन मंदिर किस देवता का है। वैसे, अभी तक यहां से मिले अवशेष के आधार पर यह शिव मंदिर ही प्रतिक हो रहा है।

Ujjain Mahakal Excavation 
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