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मध्यप्रदेश का धार्मिक मुख्यालय उज्जैन होगा

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मध्यप्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को बढ़ावा देने के लिए मोहन सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सिंहस्थ से पहले मुख्यमंत्री मोहन सरकार ने धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग का मुख्यालय भोपाल से उज्जैन स्थानांतरित करने का फैसला किया है। यह कदम राज्य के धार्मिक केंद्र के रूप में उज्जैन की प्रतिष्ठा को और मजबूत करेगा।
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग, जो पहले भोपाल के सतपुड़ा भवन से संचालित होता था, अब उज्जैन के सिंहस्थ मेला प्राधिकरण भवन में स्थित होगा। यह स्थानांतरण न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए एक केंद्रीकृत मंच भी प्रदान करेगा।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का संचालन भी अब उज्जैन से किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों को धार्मिक स्थलों की यात्रा कराने में सहायता प्रदान करना है। उज्जैन, अपने धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, और इस योजना के संचालन के लिए एक उपयुक्त स्थान माना गया है।
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के मुख्यालय के उज्जैन में स्थानांतरित होने से, विभाग के सभी प्रमुख अधिकारी और कर्मचारियों का स्थाई रूप से उज्जैन में स्थानांतरण किया जाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि सभी प्रशासनिक और कार्यकारी कार्य यहीं से प्रभावी ढंग से संचालित हों।
यह फैसला उज्जैन के धार्मिक महत्व को और भी उजागर करेगा और राज्य के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगा। उज्जैन, जो महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के लिए प्रसिद्ध है, अब धार्मिक प्रशासन का केंद्र बन जाएगा, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को भी अधिक सुविधाएं मिलेंगी।
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग ने इस स्थानांतरण के लिए अधिसूचना भी जारी कर दी है। इस निर्णय का स्वागत राज्य के धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों ने किया है, जिन्होंने इसे उज्जैन के धार्मिक महत्व को मान्यता देने वाला कदम बताया है। यह फैसला राज्य के धार्मिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को मजबूत करने और धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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