दिल्ली ब्लास्ट: आतंकी डॉक्टर्स की अलग-अलग हैंडलर को थी रिपोर्टिंग, फंडिंग और झगड़े का खुलासा
दिल्ली ब्लास्ट: आतंकी डॉक्टर्स की अलग-अलग हैंडलर को थी रिपोर्टिंग, फंडिंग और झगड़े का खुलासा

नई दिल्ली – राजधानी दिल्ली में हुए ब्लास्ट के मामले में पुलिस और जांच एजेंसियों ने आतंकी नेटवर्क के कई पहलुओं का खुलासा किया है। जांच में पता चला है कि आतंकी डॉक्टर्स के अलग-अलग हैंडलर थे, जिनके जरिए उन्हें हथियारों और फंडिंग से संबंधित रिपोर्टिंग करनी होती थी।
जांच अधिकारियों के अनुसार, ब्लास्ट की तैयारी और फंडिंग के लिए अलग-अलग हैंडलरों की भूमिका महत्वपूर्ण थी। आतंकी उमर और मुजम्मिल ने हथियारों की खरीद और फंडिंग के लिए अलग-अलग चैनलों का इस्तेमाल किया। इसी फंडिंग को लेकर दोनों के बीच झगड़े और आपसी विवाद भी सामने आए।
जांच में यह भी पता चला कि इन हैंडलरों के जरिए न केवल पैसा जुटाया गया, बल्कि आतंकियों की ट्रेनिंग, योजना और नेटवर्किंग की निगरानी भी की जाती थी। इसका उद्देश्य था कि ब्लास्ट की योजना बिना किसी रुकावट के पूरी की जा सके।
उमर और मुजम्मिल के झगड़े से पता चलता है कि आतंकी नेटवर्क में आंतरिक संघर्ष और वित्तीय विवाद भी बड़े खतरों का कारण बन सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे झगड़े अक्सर आतंकी गतिविधियों को रोकने का मौका भी देते हैं, क्योंकि इन संघर्षों के चलते नेटवर्क कमजोर पड़ सकता है।

पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बताया कि फंडिंग के स्रोत, हैंडलर और आतंकी संगठन के कनेक्शन की जांच अब भी जारी है। जांच एजेंसियों ने कहा कि ब्लास्ट में शामिल सभी संदिग्धों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह से उजागर किया जाएगा।
इस मामले ने राजधानी और देशभर में सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता की जरूरत को फिर से रेखांकित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकी नेटवर्क में फंडिंग, हथियारों की उपलब्धता और हैंडलरों की भूमिका को समझना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हमलों को रोका जा सके।
आतंकियों के हैंडलर अलग होने और फंडिंग को लेकर झगड़ा होने की जानकारी से यह साफ होता है कि आतंकी संगठन हमेशा सुपरवाइज्ड और नियंत्रित नहीं होते। इनके अंदर आपसी संघर्ष और वित्तीय विवाद भी नेटवर्क के कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं।
इस ब्लास्ट मामले में उमर और मुजम्मिल के झगड़े ने जांच को नई दिशा दी है। पुलिस ने कहा कि इस नेटवर्क के अन्य कनेक्शन और फंडिंग चैनल की जानकारी जुटाई जा रही है। इससे पता चलेगा कि आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए कौन से कदम जरूरी हैं।





