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इंदौर में 4.5°C—10 साल का रिकॉर्ड टूटा; राजस्थान-उत्तराखंड में भी ठंड का प्रकोप चरम पर

इंदौर में 4.5°C—10 साल का रिकॉर्ड टूटा; राजस्थान-उत्तराखंड में भी ठंड का प्रकोप चरम पर

मध्य प्रदेश में इस समय कड़ाके की सर्दी अपने चरम पर है। इंदौर में गुरुवार रात का तापमान 4.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे कम है। इससे पहले दिसंबर 2015 में 7 डिग्री तापमान दर्ज हुआ था, जिसे उस दशक का सबसे कम तापमान माना गया था। इस बार का तापमान उससे भी नीचे चला गया, जिससे शहर में सर्दी का प्रकोप अचानक बढ़ गया है।

इंदौर में सुबह और रात के समय ठंडी हवाओं के साथ कड़ाके की सर्दी महसूस की जा रही है। न्यूनतम तापमान में अचानक आई गिरावट ने लोगों को आग के अलाव, कमरे के हीटर और गर्म कपड़ों का सहारा लेने पर मजबूर कर दिया। स्कूली बच्चों और बुजुर्गों पर सर्दी का सबसे अधिक असर देखा जा रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और उत्तरी हवाएं इस तेज ठंड के लिए जिम्मेदार हैं। अगले कुछ दिनों तक इंदौर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में इसी तरह की स्थिति बनी रह सकती है।

इंदौर की तरह राजस्थान में भी सर्दी का प्रकोप जारी है। गुरुवार को यहां 9 शहरों का तापमान 10 डिग्री से नीचे पहुंच गया। सीकर के फतेहपुर में सबसे कम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। नागौर में तापमान 5 डिग्री, सीकर में 5.5 डिग्री और लूणकरणसर में 5.6 डिग्री दर्ज किया गया। राजधानी जयपुर भी ठंड की चपेट में रहा और यहां न्यूनतम तापमान 10.7 डिग्री तक गिर गया। प्रदेश भर में सुबह के समय धुंध और शीतलहर का असर देखने को मिल रहा है।

इसके साथ ही उत्तराखंड में ठंड ने हालात और भी कठिन कर दिए हैं। पिछले कुछ दिनों की भारी बर्फबारी के बाद अब पाला गिरने लगा है। इससे पहाड़ों पर नदी, नाले और कई झरने तक जम गए हैं। चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में तो घरों की पानी की पाइपलाइन तक जम चुकी है, जिससे स्थानीय लोगों को पानी भरने के लिए कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बर्फीली हवाओं के कारण तापमान शून्य से नीचे पहुंच गया है और कई इलाकों में जीवन लगभग ठहर गया है।

हरिद्वार, हल्द्वानी और रुद्रपुर में घना कोहरा छाया हुआ है। सुबह-सुबह दृश्यता काफी कम हो जाती है, जिससे सड़क यातायात प्रभावित हो रहा है। वाहन चालक धीमी गति से वाहन चलाने को मजबूर हैं। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए कोल्ड डे कंडीशन्स और घने कोहरे की चेतावनी जारी की है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर भारत में जारी इस कड़ाके की ठंड का असर मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों पर भी सीधा पड़ रहा है। हवा की दिशा उत्तरी बने रहने के कारण तापमान में लगातार गिरावट देखने को मिलेगी। सामान्य तौर पर दिसंबर महीने में इतनी तेज ठंड कम ही देखने को मिलती है, लेकिन इस बार मौसम सामान्य से अधिक ठंडा हो चला है।

कुल मिलाकर, इंदौर से लेकर उत्तराखंड तक शीतलहर का असर साफ दिखाई दे रहा है। तापमान में गिरावट के साथ ही कई राज्यों में आम जनजीवन प्रभावित हुआ है और लोग अब कड़ाके की ठंड से राहत का इंतजार कर रहे हैं।

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