इंदौर ग्रीनफील्ड परियोजना का विरोध तेज, दलित समाज ने किया कलेक्टर कार्यालय का घेराव
इंदौर ग्रीनफील्ड परियोजना का विरोध तेज, दलित समाज ने किया कलेक्टर कार्यालय का घेराव

इंदौर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड परियोजना एक बार फिर विवादों में आ गई है। मंगलवार को इस परियोजना के विरोध में दलित समाज के सैकड़ों लोगों ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ग्रीनफील्ड के नाम पर उनकी वर्षों पुरानी उपजाऊ जमीन, घर और खेती को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, लेकिन अब तक उनकी शिकायतों पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई है।
स्थानीय रहवासियों के अनुसार, जिस क्षेत्र में ग्रीनफील्ड रोड बनाई जा रही है, वहां कई वर्षों से लोग खेती कर रहे हैं। यह जमीन उनके लिए आजीविका का मुख्य साधन है। आरोप है कि निर्माण कार्य के चलते बोई गई फसल तक खराब हो चुकी है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने मीडिया से बातचीत में बताया कि यह जमीन उन्हें सन 1942 से प्राप्त है, जो तत्कालीन राजा यशवंतराव द्वारा उनके पूर्वजों को तोहफे में दी गई थी। उनका कहना है कि यह जमीन मेहनत की कमाई है और उनके परिवार के सदस्यों ने उस दौर में शासन-प्रशासन के साथ मिलकर कार्य किया था। ऐसे में बिना उचित मुआवजा और सहमति के जमीन लेना अन्याय है।
रहवासियों ने साफ शब्दों में कहा कि वे अपना हक चाहते हैं, उनके घर न तोड़े जाएं और खेती योग्य जमीन को बचाया जाए। प्रदर्शनकारियों का यह भी आरोप है कि ग्रीनफील्ड परियोजना को लेकर पहले भी कई बार धरना-प्रदर्शन किए गए, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।
इस प्रदर्शन के दौरान कलेक्टर कार्यालय के बाहर माहौल तनावपूर्ण रहा, हालांकि पुलिस बल की मौजूदगी के चलते स्थिति नियंत्रण में रही। नारेबाजी कर रहे लोगों ने प्रशासन से मांग की कि परियोजना पर पुनर्विचार किया जाए या प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास दिया जाए।
इस पूरे मामले पर इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब भी इस तरह की कोई बड़ी परियोजना बनाई जाती है, तो सबसे पहले प्रभावित लोगों की बात सुनी जाती है। उन्होंने कहा, “अगर ग्रीनफील्ड परियोजना से किसी को वास्तविक समस्या हो रही है, तो उसका निराकरण किया जाएगा। प्रशासन प्रभावित पक्ष से संवाद कर समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।”
फिलहाल ग्रीनफील्ड परियोजना को लेकर विरोध थमता नजर नहीं आ रहा है। रहवासियों का कहना है कि जब तक उनकी जमीन और घरों की सुरक्षा को लेकर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।





