इंदौर में नगर निगम की बड़ी कार्रवाई: पुरा घड़ी वाली मस्जिद के जमात खाने की 25 दुकानें सील
इंदौर में नगर निगम की बड़ी कार्रवाई: पुरा घड़ी वाली मस्जिद के जमात खाने की 25 दुकानें सील

इंदौर में नगर निगम ने राजस्व वसूली को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव के निर्देश पर पुरा घड़ी वाली मस्जिद के जमात खाने से जुड़ी 25 दुकानों को सील कर दिया गया है। यह कार्रवाई नगर निगम इंदौर के राजस्व विभाग द्वारा की गई, जिसका उद्देश्य लंबे समय से बकाया चल रहे करों की वसूली करना है।
क्यों की गई सीलिंग की कार्रवाई?
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, पुरा घड़ी वाली मस्जिद पर कुल 4,61,020 रुपये का बकाया है। इस राशि में संपत्ति कर, जल कर और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (कचरा शुल्क) शामिल हैं। कई बार नोटिस जारी करने और भुगतान के लिए समय देने के बावजूद जब बकाया राशि जमा नहीं की गई, तब निगम ने कानूनी प्रक्रिया के तहत यह कदम उठाया।
राजस्व विभाग की सख्ती
नगर निगम के राजस्व विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी विशेष संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि नियमों के अनुसार बकाया कर वसूली की प्रक्रिया का हिस्सा है। निगम का कहना है कि शहर में सभी धार्मिक, व्यावसायिक और निजी संपत्तियों पर कर नियम समान रूप से लागू होते हैं और बकाया रहने की स्थिति में कार्रवाई की जाती है।
धारा 175 के तहत चेतावनी
नगर निगम ने मस्जिद प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि जल्द ही बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 175 के तहत आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अंतर्गत चल और अचल संपत्ति को कुर्क कर बकाया राशि की वसूली की जा सकती है।
स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय
इस कार्रवाई के बाद स्थानीय क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोग इसे निगम की सख्ती बता रहे हैं, तो कुछ इसे राजस्व व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में जरूरी कदम मान रहे हैं। नगर निगम का कहना है कि शहर के विकास कार्यों, सफाई व्यवस्था, जल आपूर्ति और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए राजस्व वसूली बेहद जरूरी है।
निगम का संदेश साफ
नगर निगम प्रशासन ने इस कार्रवाई के जरिए साफ संदेश दिया है कि बकाया करों को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। चाहे संपत्ति धार्मिक हो, व्यावसायिक या निजी—यदि कर बकाया है तो नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
आगे क्या?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मस्जिद प्रबंधन कब तक बकाया राशि जमा करता है। भुगतान होने के बाद सील की गई दुकानों को खोलने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। वहीं, समय पर भुगतान न होने की स्थिति में निगम आगे और कड़े कदम उठा सकता है।





