इंदौर का सफाई मॉडल और मजबूत: 29 नए गांवों में ‘सफाई चौपाल’ से बदलेगी तस्वीर
इंदौर का सफाई मॉडल और मजबूत: 29 नए गांवों में ‘सफाई चौपाल’ से बदलेगी तस्वीर

इंदौर, जिसे देश का सबसे स्वच्छ शहर कहा जाता है, एक बार फिर अपने सफाई मॉडल को और सशक्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। नगर निगम सीमा में हाल ही में शामिल हुए 29 गांवों में अब सफाई, ड्रेनेज, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर एक नई पहल शुरू की गई है, जिसे नाम दिया गया है — सफाई चौपाल। इस पहल का मकसद केवल सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाना नहीं, बल्कि जनता से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं का मौके पर समाधान करना भी है।
इन गांवों में लंबे समय से ड्रेनेज लाइन की कमी, पानी की अनियमित आपूर्ति, कचरा संग्रहण की व्यवस्था न होना और सफाई कर्मचारियों की कमी जैसी समस्याएं बनी हुई थीं। नगर निगम ने इन चुनौतियों को गंभीरता से लेते हुए अब यहां 100 प्रतिशत ड्रेनेज लाइन डालने, सफाई वाहनों की संख्या बढ़ाने, अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों और दरोगाओं की नियुक्ति करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है।
सफाई चौपाल: संवाद और समाधान का मंच
सफाई चौपाल के माध्यम से नगर निगम सीधे ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों से जुड़ रहा है। यहां लोगों को न सिर्फ अपनी समस्याएं रखने का मौका मिल रहा है, बल्कि उन्हें यह भी समझाया जा रहा है कि सफाई सिर्फ नगर निगम की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। इस पहल से लोगों में जागरूकता बढ़ रही है और वे खुद भी सफाई अभियान से जुड़ रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका
विधायक मधु वर्मा का कहना है कि इंदौर का सफाई मॉडल तभी सफल हो पाया, जब जनता का भरोसा नगर निगम पर बना। उन्होंने कहा कि जब लोगों को यह विश्वास हुआ कि उनकी शिकायतें सुनी जाएंगी और उनका समाधान होगा, तब उन्होंने खुद सफाई को अपनी जिम्मेदारी माना।
वहीं, महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए हर वार्ड में सफाई चौपाल लगाने की पहल की है। इन चौपालों में वे स्वयं पहुंचकर नागरिकों से बातचीत कर रहे हैं और कचरा गाड़ी की नियमितता, सफाई व्यवस्था, पानी की सप्लाई और ड्रेनेज की स्थिति पर फीडबैक ले रहे हैं।
बाइट – महापौर पुष्यमित्र भार्गव:
“सफाई चौपाल का उद्देश्य जनता को साथ लेकर चलना है। जब नागरिक भागीदार बनते हैं, तभी स्वच्छता स्थायी होती है।”
बाइट – विधायक मधु वर्मा:
“इंदौर की सफलता का राज जनता का विश्वास और उनकी भागीदारी है। यही मॉडल अब नए गांवों में भी लागू हो रहा है।”
20 करोड़ की ड्रेनेज परियोजना से बड़ी राहत
बीते दिनों करीब 20 करोड़ रुपये की ड्रेनेज परियोजना का भूमिपूजन किया गया है। उम्मीद है कि आने वाले 6 से 8 महीनों में इन क्षेत्रों को जलभराव और गंदगी से बड़ी राहत मिलेगी। इसके साथ ही पानी की नई पाइपलाइन और टंकियों का निर्माण भी तेज़ी से किया जा रहा है।
स्वच्छता की मिसाल बना इंदौर
कुल मिलाकर, जनता की भागीदारी, जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और मौके पर समाधान की यह पहल इंदौर के सफाई मॉडल को और अधिक मजबूत बना रही है। यही वजह है कि इंदौर न सिर्फ आज, बल्कि भविष्य में भी स्वच्छता की मिसाल बना रहने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।




