राजा रघुवंशी हत्याकांड: जमानत याचिका में सोनम का दावा – “मैंने राजा को नहीं मारा, वह मेरा भाई था”
राजा रघुवंशी हत्याकांड: जमानत याचिका में सोनम का दावा – “मैंने राजा को नहीं मारा, वह मेरा भाई था”

इंदौर के बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बार फिर सियासी, पारिवारिक और कानूनी हलचल तेज हो गई है। इस सनसनीखेज मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने अदालत में जमानत याचिका दायर करते हुए खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया है। जमानत याचिका में सोनम ने कहा है कि “मैंने राजा रघुवंशी की हत्या नहीं की, और राज तो मेरा भाई था”।
सोनम ने अपनी याचिका में दावा किया है कि उस पर लगाए गए सभी आरोप झूठे, मनगढ़ंत और तथ्यों से परे हैं। याचिका के मुताबिक, वह इस पूरे मामले में फंसाई गई है और उसके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है। सोनम का कहना है कि वह जांच में पूरा सहयोग कर चुकी है और आगे भी सहयोग करने को तैयार है।
दूसरी ओर, मृतक राजा रघुवंशी के परिवार ने सोनम की जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया है। राजा के भाई विपिन रघुवंशी ने आरोप लगाया है कि सोनम को जमानत दिलाने के लिए प्रभाव और दबाव का इस्तेमाल किया जा रहा है। विपिन का कहना है कि यदि आरोपी को जमानत मिलती है, तो इससे न सिर्फ जांच प्रभावित होगी बल्कि गवाहों को भी खतरा हो सकता है।
गौरतलब है कि इस मामले में सोनम समेत कुल चार आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस और जांच एजेंसियों ने अब तक कई अहम गवाहों के बयान दर्ज किए हैं और चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में बताई जा रही है। जांच एजेंसी का दावा है कि हत्या की साजिश रची गई थी और इसमें सभी आरोपियों की भूमिका संदिग्ध है।
राजा रघुवंशी हत्याकांड शुरू से ही चर्चा में रहा है। यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्तों, संपत्ति विवाद और आपसी रंजिश के आरोपों से भी जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। यही वजह है कि इस केस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी नजरें टिकी हुई हैं।
अब अदालत के सामने बड़ा सवाल यह है कि सोनम रघुवंशी को जमानत दी जाए या नहीं। अदालत को यह तय करना होगा कि आरोपों की गंभीरता, उपलब्ध सबूत और जांच की स्थिति को देखते हुए जमानत उचित है या नहीं।
फिलहाल, राजा रघुवंशी हत्याकांड में अगली सुनवाई का सभी को इंतजार है। यह देखना अहम होगा कि अदालत सोनम की दलीलों को कितना स्वीकार करती है और इस हाई-प्रोफाइल केस में आगे क्या कानूनी दिशा तय होती है।





