इटली में सजा पाई PFAS कंपनी अब भारत शिफ्ट, खतरनाक कैमिकल्स से बढ़ी पर्यावरण चिंता

Environmental News: इटली में प्रदूषण फैलाने के आरोप में बंद की गई एक कैमिकल कंपनी अब भारत में अपना उत्पादन शुरू कर चुकी है। यह मामला न सिर्फ यूरोप बल्कि भारत के लिए भी गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य चिंता बनता जा रहा है। इटली की चर्चित कैमिकल कंपनी मिटेनी एसपीए (Miteni S.p.A.), जो खतरनाक PFAS (Per- and Polyfluoroalkyl Substances) कैमिकल्स बनाती थी, अब सीधे तौर पर भारत शिफ्ट हो चुकी है।
PFAS को “फॉरएवर कैमिकल्स” कहा जाता है, क्योंकि ये न तो पर्यावरण में नष्ट होते हैं और न ही मानव शरीर से आसानी से बाहर निकलते हैं। द गार्डियन और अन्य अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन कैमिकल्स का संबंध कैंसर, हार्मोनल गड़बड़ी, बांझपन और दिल की बीमारियों से जुड़ा पाया गया है।
2013 में खुला प्रदूषण का जहर
साल 2013 में इटली की क्षेत्रीय पर्यावरण एजेंसी ARPAV ने ट्रिसिनो और आसपास के इलाकों में पानी के सैंपल लिए। जांच में भूजल में PFAS की मात्रा तय सीमा से कई गुना अधिक पाई गई। रिपोर्ट में सामने आया कि इस प्रदूषण का असर विकेंजा स्टेट के करीब 3.5 लाख लोगों तक पहुंच चुका था। इसे यूरोप के सबसे बड़े PFAS प्रदूषण मामलों में गिना गया।
इंसानों के खून तक पहुंचा जहर
पडुआ यूनिवर्सिटी के ह्यूमन राइट्स सेंटर की स्टडी में खुलासा हुआ कि PFAS लोगों के खून में भी मौजूद है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों में इसके गंभीर असर देखने को मिले। इम्यून सिस्टम कमजोर होना, हार्मोनल समस्याएं और कैंसर के मामले बढ़ने लगे। इसे इटली में पब्लिक हेल्थ क्राइसिस घोषित किया गया।
जांच के बावजूद चलता रहा प्रोडक्शन
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जांच शुरू होने के बाद भी मिटेनी कंपनी ने PFAS का उत्पादन बंद नहीं किया। उस समय कंपनी की हिस्सेदारी मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन समेत अन्य औद्योगिक समूहों के पास थी। स्थानीय लोगों और पर्यावरण संगठनों ने विरोध किया, लेकिन कानूनी प्रक्रिया लंबी चलती रही और प्रदूषण बढ़ता गया।
2018 में कंपनी हुई दिवालिया
लगातार दबाव के बाद 2018 में मिटेनी को दिवालिया घोषित कर दिया गया। फैक्ट्री बंद हुई, लेकिन दूषित जमीन और पानी की सफाई को लेकर कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई। आज भी उस इलाके में प्रदूषण के असर देखे जाते हैं।

11 अधिकारियों को जेल, भारी जुर्माना
जून 2025 में विकेंजा कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। मिटेनी के 11 पूर्व अधिकारियों को दोषी ठहराया गया और कुल 141 साल की जेल की सजा सुनाई गई। साथ ही 58 से 75 मिलियन यूरो (लगभग 80 हजार करोड़ रुपये) तक का जुर्माना लगाया गया। यह यूरोप का पहला आपराधिक PFAS केस था।
भारत में शिफ्ट हुआ पूरा सेटअप
2019 में कंपनी की संपत्तियों की नीलामी हुई, जिसे भारत की लक्ष्मी ऑर्गेनिक इंडस्ट्रीज की सब्सिडियरी वीवा लाइफसाइंसेज ने खरीदा। मशीनें, टेक्नोलॉजी और पेटेंट्स समुद्र के रास्ते भारत लाए गए।
2023–24 में मशीनें मुंबई पोर्ट पहुंचीं और महाराष्ट्र के लोटे परशुराम MIDC में नया यूनिट लगाया गया। 2025 की शुरुआत में प्रोडक्शन भी शुरू हो गया।
भारत के सामने नया खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि PFAS प्रोडक्शन यूरोप से भारत शिफ्ट हो चुका है। भारत में PFAS के लिए कोई अलग सख्त कानून नहीं है। कमजोर मॉनिटरिंग वाले देशों में खतरनाक उद्योगों का शिफ्ट होना अब एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है—क्या भारत अगला पर्यावरणीय संकट झेलने जा रहा है?





