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सतना सड़क विवाद: पहले ही फेल थी सड़क, फिर मंत्री निरीक्षण पर क्यों पहुंचे? CM ने उठाया सवाल

DR Times
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Satna Road Controversy: सतना जिले की पौड़ी–मंकरही सड़क का मामला अब केवल अमानक निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सरकार के भीतर सवाल-जवाब और जवाबदेही का विषय बन गया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा पहले ही इस सड़क को अमानक घोषित किए जाने के बावजूद, राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के निरीक्षण पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आपत्ति जताई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में पूछा कि जब विभागीय जांच में सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठ चुके थे, तो फिर मौके पर जाकर निरीक्षण करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

पहले ही अमानक घोषित हो चुकी थी सड़क

पौड़ी–मंकरही मार्ग लगभग तीन किलोमीटर लंबा है, जिसका हाल ही में नवीनीकरण किया गया था। निर्माण के कुछ ही समय बाद सड़क की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने शिकायतें दर्ज कराईं। इन शिकायतों के बाद लोक निर्माण विभाग ने सड़क की तकनीकी जांच कराई।
जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर बताया गया कि यह PSC सड़क तय मानकों पर खरी नहीं उतरती। सड़क की सतह कमजोर पाई गई, सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठे और फिनिशिंग भी संतोषजनक नहीं थी। रिपोर्ट के आधार पर ठेकेदार को निर्देश दिए गए थे कि वह सड़क को दोबारा मानकों के अनुरूप तैयार करे।

निरीक्षण के दौरान उखड़ती दिखी सड़क

इन निर्देशों के बावजूद 21 दिसंबर को नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी पौड़ी–मंकरही सड़क के निरीक्षण के लिए मौके पर पहुंचीं। निरीक्षण के दौरान मंत्री सड़क पर पैदल चलीं और स्थिति का जायजा लिया। इसी दौरान सड़क की ऊपरी परत जगह-जगह से उखड़ती नजर आई।
मंत्री ने मौके पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से सवाल किए। निरीक्षण के दौरान सड़क उखड़ने के वीडियो और तस्वीरें सामने आईं, जो कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इन वीडियो ने सड़क निर्माण की पोल खोल दी और सरकार की किरकिरी भी कराई।

मुख्यमंत्री ने उठाया निरीक्षण पर सवाल

जब यह मामला भोपाल पहुंचा तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूरे घटनाक्रम पर संज्ञान लिया। उन्होंने मंत्री प्रतिमा बागरी से सीधा सवाल किया कि जब PWD की रिपोर्ट में सड़क पहले ही अमानक घोषित हो चुकी थी, तो निरीक्षण के लिए मौके पर जाने की जरूरत क्यों पड़ी।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई और जवाबदेही तय करना ज्यादा जरूरी है, बजाय इसके कि निरीक्षण को केवल प्रतीकात्मक बनाया जाए।

प्रशासनिक जिम्मेदारी पर बहस

यह मामला अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर विभागीय रिपोर्ट के बावजूद सड़क दोबारा नहीं सुधारी गई, तो यह ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही को दर्शाता है। वहीं मंत्री के निरीक्षण पर उठे सवाल यह भी बताते हैं कि सरकार के भीतर समन्वय और प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता की जरूरत है।

फिलहाल यह देखना अहम होगा कि अमानक सड़क निर्माण के लिए जिम्मेदार ठेकेदार और अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठाती है।

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