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इंदौर: फर्जी ई-चालान APK से पुलिसकर्मियों के मोबाइल हैक, साइबर हमले ने मचाया हड़कंप

इंदौर: फर्जी ई-चालान APK से पुलिसकर्मियों के मोबाइल हैक, साइबर हमले ने मचाया हड़कंप

इंदौर शहर में साइबर अपराधियों ने पुलिस विभाग को चौंका दिया। शहर के आजाद नगर, लसूडिया और चंदन नगर थानों में तैनात लगभग एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों के मोबाइल फोन एक फर्जी ई-चालान APK फाइल के जरिए हैक कर लिए गए हैं। इस साइबर हमले के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और तत्काल प्रभाव से एडवाइजरी जारी की गई।

घटना के अनुसार, साइबर अपराधियों ने पुलिसकर्मियों के व्हाट्सएप नंबर पर ई-चालान नामक APK फाइल भेजी। फाइल पर क्लिक करते ही पुलिसकर्मियों के मोबाइल फोन हैकर्स के नियंत्रण में चले गए। इसके बाद इन मोबाइल से अन्य संपर्कों और लोगों को भी वही फर्जी फाइल भेजी जा रही है। इस चेन रिएक्शन से आम जनता के मोबाइल के हैक होने का खतरा भी बढ़ गया है।

हैक किए गए फोन अब अनजाने में डेटा चोरी, फर्जी लिंक प्रसारित करने और संवेदनशील जानकारी लीक करने का काम कर रहे हैं। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के हमले बेहद शातिर और तेजी से फैलने वाले होते हैं। ऐसे में सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार है।

विशेषज्ञों ने जनता और पुलिसकर्मियों को सलाह दी है कि कभी भी व्हाट्सएप पर सीधे APK फाइल डाउनलोड न करें। ट्रैफिक विभाग कभी भी चालान की जानकारी के लिए APK या लिंक सीधे किसी कर्मचारी के व्हाट्सएप पर नहीं भेजता। आधिकारिक चालान केवल सरकारी वेबसाइटों जैसे mParivahan या अधिकृत एसएमएस लिंक के माध्यम से ही चेक किए जा सकते हैं।

इंदौर पुलिस ने कहा कि हैकिंग की जांच शुरू कर दी गई है और प्रभावित मोबाइल्स को तुरंत नेटवर्क से डिस्कनेक्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, सभी थानों के कर्मियों को साइबर सुरक्षा एडवाइजरी भेजी गई ताकि कोई और कर्मचारी इस फर्जी लिंक का शिकार न बने।

साइबर क्राइम विशेषज्ञों ने कहा कि फर्जी ई-चालान APK फाइलें अक्सर मालवेयर और ट्रोजन वायरस के साथ आती हैं। ये न केवल डेटा चोरी करती हैं बल्कि फोन पर नियंत्रण भी हासिल कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को अनजानी फाइलों को इंस्टॉल न करने, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने और एंटीवायरस ऐप अपडेट रखने की सलाह दी गई है।

यह घटना इंदौर में साइबर सुरक्षा की नाजुक स्थिति को उजागर करती है। पुलिसकर्मियों के मोबाइल हैक होने से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो सकता है। वहीं, आम जनता को भी सतर्क रहकर फर्जी लिंक से खुद को बचाना चाहिए।

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