इसरो ने साल के आखिरी मिशन में रचा इतिहास, LVM3 ‘बाहुबली’ से 6100 किलो का ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह सफलतापूर्वक लॉन्च
इसरो ने साल के आखिरी मिशन में रचा इतिहास, LVM3 ‘बाहुबली’ से 6100 किलो का ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह सफलतापूर्वक लॉन्च

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने साल 2025 के अपने आखिरी मिशन के साथ एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। इसरो ने भारत की धरती से अब तक का सबसे बड़ा और सबसे भारी वाणिज्यिक संचार उपग्रह ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ सफलतापूर्वक लॉन्च कर पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में स्थापित कर दिया है। यह मिशन पूरी तरह से कॉमर्शियल लॉन्च था, जिसने वैश्विक स्पेस मार्केट में भारत की मजबूत मौजूदगी को और पुख्ता कर दिया है।
यह 6,100 किलोग्राम वजनी उपग्रह अमेरिका की कंपनी AST स्पेसमोबाइल का है। इस लॉन्चिंग के लिए इसरो ने अपने हेवी-लिफ्ट रॉकेट LVM3 का इस्तेमाल किया, जिसे उसकी ताकत और क्षमता के कारण ‘बाहुबली रॉकेट’ भी कहा जाता है। यह LVM3 की छठवीं उड़ान और तीसरी वाणिज्यिक उड़ान रही।
16 मिनट में मिशन सफल
ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 की लॉन्चिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 8:55 बजे की गई। इसरो के अनुसार, लगभग 16 मिनट की उड़ान के बाद उपग्रह रॉकेट से अलग होकर करीब 520 किलोमीटर ऊंचाई पर पृथ्वी की निचली कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हो गया। यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और AST स्पेसमोबाइल के बीच हुए कमर्शियल समझौते का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताई खुशी
इस ऐतिहासिक सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर इसरो की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं की ताकत से अंतरिक्ष कार्यक्रम और अधिक आधुनिक व प्रभावशाली बन रहा है। LVM3 की यह सफलता भविष्य के गगनयान मिशन, वाणिज्यिक लॉन्च सेवाओं और वैश्विक साझेदारियों के लिए मजबूत नींव रखती है।
क्यों खास है ब्लूबर्ड ब्लॉक-2?
ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 एक नेक्स्ट-जनरेशन सैटेलाइट सिस्टम का हिस्सा है। इसके सफल परीक्षण के बाद दुनिया में पहली बार 4G और 5G स्मार्टफोन को सीधे सैटेलाइट से कनेक्टिविटी मिल सकेगी। इसके लिए न तो मोबाइल टावर की जरूरत होगी और न ही किसी अतिरिक्त एंटीना या विशेष हार्डवेयर की।
यह तकनीक पहाड़ी इलाकों, महासागरों, रेगिस्तानों और दूरदराज के क्षेत्रों तक मोबाइल नेटवर्क पहुंचाने में क्रांतिकारी साबित हो सकती है। इसके अलावा, आपदाओं के समय—जैसे भूकंप, बाढ़, तूफान या भूस्खलन—जब ज़मीनी टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट हो जाता है, तब सैटेलाइट नेटवर्क जीवनरेखा बन सकता है।
कमर्शियल स्पेस में भारत की मजबूत पकड़
इस मिशन के साथ इसरो ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह केवल वैज्ञानिक मिशनों तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक वाणिज्यिक स्पेस सेक्टर में भी एक भरोसेमंद खिलाड़ी बन चुका है। चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और वनवेब जैसे सफल मिशनों के बाद ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 ने इसरो की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को और ऊंचा किया है।





