देवास में रील का जुनून बना मौत की वजह: रेलवे ट्रैक पर वीडियो बनाते समय दो नाबालिग लड़कों की ट्रेन से कटकर दर्दनाक मौत

सोशल मीडिया पर रील बनाने का जुनून एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है। मध्य प्रदेश के देवास जिले से सामने आए दर्दनाक हादसे में रेलवे ट्रैक पर रील बना रहे दो नाबालिग लड़कों की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। इस हादसे ने न सिर्फ दो परिवारों के सपनों को तोड़ दिया, बल्कि समाज के सामने सोशल मीडिया के खतरनाक ट्रेंड पर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
यह दर्दनाक घटना देवास के बिरखेड़ी रेलवे क्रॉसिंग के पास हुई। मृतकों की पहचान आलोक (16) और सनी योगी (16) के रूप में हुई है। दोनों लड़के देवास के इंडस्ट्रियल एरिया के रहने वाले थे और काफी समय से सोशल मीडिया पर एक्टिव थे। बताया जा रहा है कि वे इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म के लिए रील बनाने के शौकीन थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों किशोर रेलवे ट्रैक पर खड़े होकर वीडियो शूट कर रहे थे। इसी दौरान दो समानांतर पटरियों पर एक साथ ट्रेनें आ गईं। तेज रफ्तार ट्रेनों को देखकर उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला और दोनों ट्रेन की चपेट में आ गए। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर ही दोनों की मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और परिजनों को सूचना दी। जैसे ही परिवार को इस हादसे की खबर मिली, घर में कोहराम मच गया। मोहल्ले में मातम पसरा हुआ है और हर आंख नम है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे ट्रैक पर रील बनाना इन दिनों युवाओं के बीच एक खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है। पहले भी कई बार ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद युवा सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज के चक्कर में अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। देवास हादसा इसी लापरवाही का ताजा उदाहरण है।
पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि रेलवे ट्रैक या किसी भी खतरनाक जगह पर वीडियो बनाने से बचें। रेलवे ट्रैक पर जाना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि जानलेवा भी हो सकता है। प्रशासन का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्ती जरूरी है।
यह हादसा एक कड़वी सच्चाई को उजागर करता है कि सोशल मीडिया की चकाचौंध में युवा अपनी सुरक्षा को नजरअंदाज कर रहे हैं। कुछ सेकंड की रील और कुछ लाइक्स की चाहत ने दो मासूम जिंदगियों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। सवाल यह है कि आखिर कब तक ऐसे हादसे हमें झकझोरते रहेंगे?





