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MP Politics: राष्ट्रीय जल पुरस्कार पर AI तस्वीरों का विवाद, कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप, खंडवा प्रशासन ने किया सख्त खंडन

मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय जल पुरस्कार को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि खंडवा जिले के प्रशासन ने AI से बनाई गई तस्वीरों के आधार पर जल संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार हासिल किया। इस मुद्दे को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

कांग्रेस का बड़ा आरोप

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 29 दिसंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि BJP सरकार तकनीक का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि खंडवा जिले में वास्तविक जल संरक्षण कार्य नहीं हुए, बल्कि दो फुट गहरे गड्ढों को AI के माध्यम से कुएं और तालाब के रूप में दर्शाया गया

पटवारी का कहना है कि AI से तैयार इन तस्वीरों को सरकारी पोर्टल पर अपलोड कर केंद्र सरकार को गुमराह किया गया और इन्हीं कथित उपलब्धियों के आधार पर जिले को माननीय राष्ट्रपति से राष्ट्रीय जल पुरस्कार दिलाया गया। उन्होंने इसे “तकनीकी भ्रष्टाचार” करार देते हुए कहा कि BJP शासन में भ्रष्टाचार अब स्मार्ट और डिजिटल हो गया है।

जमीनी हकीकत पर सवाल

कांग्रेस का दावा है कि जब इन कार्यों की जमीनी जांच की गई, तो कई स्थानों पर खेत और खाली मैदान मिले। पार्टी का आरोप है कि यह वास्तविक जल संरक्षण नहीं बल्कि डिजिटल इमेज मैनेजमेंट का खेल है। कांग्रेस नेताओं ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग भी की है।

प्रशासन ने आरोपों को बताया भ्रामक

विवाद बढ़ने के बाद खंडवा जिला प्रशासन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। जिला पंचायत सीईओ डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा ने कहा कि AI से बनाई गई तस्वीरों का राष्ट्रीय जल पुरस्कार से कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के ‘जल संचय, जन भागीदारी’ अभियान के तहत किए गए वास्तविक और प्रमाणित कार्यों के आधार पर खंडवा जिले ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। इसी उपलब्धि के लिए नवंबर में नई दिल्ली में आयोजित समारोह में जिले को 2 करोड़ रुपये का राष्ट्रीय जल पुरस्कार दिया गया।

आंकड़ों के साथ दिया जवाब

डॉ. गौड़ा के अनुसार खंडवा जिले में अभियान के तहत 1,29,046 जल संरक्षण कार्य किए गए हैं। इन सभी कार्यों की तस्वीरें जांच के बाद JSJB पोर्टल पर अपलोड की गई थीं। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने इनका सत्यापन किया और लगभग 1 प्रतिशत कार्यों की मौके पर जाकर जांच भी की थी।

AI तस्वीरों पर कार्रवाई के संकेत

प्रशासन ने स्वीकार किया कि ‘कैच द रेन’ पोर्टल पर AI से बनी 21 तस्वीरें अपलोड हुई थीं, लेकिन यह पोर्टल केवल शैक्षणिक और प्रेरणात्मक उद्देश्य के लिए है और इसका राष्ट्रीय जल पुरस्कार से कोई संबंध नहीं है। डॉ. गौड़ा ने कहा कि इन तस्वीरों को अपलोड करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

सियासत तेज, जांच पर नजर

राष्ट्रीय जल पुरस्कार को लेकर यह विवाद अब प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। जहां कांग्रेस इसे बड़ा घोटाला बता रही है, वहीं प्रशासन वास्तविक कार्यों के आधार पर पुरस्कार मिलने का दावा कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।

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