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दूषित पानी से बीमार पड़े 35 लोग, देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में हड़कंप, CM मोहन यादव ने लिया संज्ञान

देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर में दूषित पानी की वजह से 35 लोगों के बीमार पड़ने की घटना सामने आई है। सभी मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। यह मामला इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र का बताया जा रहा है। घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और पानी की टंकी जांच के घेरे में आ गई है।

मुख्यमंत्री और मंत्री ने लिया संज्ञान

घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले का संज्ञान लिया है। वहीं नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय स्वयं अस्पताल पहुंचे और बीमार लोगों का हालचाल जाना। मंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।

इलाज का पूरा खर्च उठाएगा प्रशासन

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि दूषित पानी से बीमार हुए सभी लोगों के इलाज का पूरा खर्च प्रशासन उठाएगा। जिन मरीजों ने इलाज के लिए पहले से पैसे जमा कर दिए हैं, उन्हें भी राशि वापस की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी पीड़ित को इलाज के अभाव में परेशानी नहीं होने दी जाएगी।

खुदाई से पानी दूषित होने की आशंका

प्राथमिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि वार्ड और आसपास के क्षेत्रों में चल रही खुदाई के कारण गंदगी पानी की टंकी में पहुंच गई, जिससे पानी दूषित हुआ। इसी दूषित पानी के सेवन से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े। प्रशासन द्वारा पानी के सैंपल लिए गए हैं और उनकी लैब जांच कराई जा रही है।

मंत्री विजयवर्गीय का बयान

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया से बातचीत में बताया कि बीते 4–5 दिनों से क्षेत्र में गंदे पानी की शिकायतें मिल रही थीं। मरीजों को उल्टी-दस्त, पेट दर्द और कमजोरी की शिकायत थी। एहतियात के तौर पर पानी में क्लोरीन की गोलियां डलवाई गई हैं। उन्होंने कहा कि मंगलवार तक दूषित पानी की वजह पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।

डोर टू डोर सर्वे जारी

नगर निगम द्वारा प्रभावित इलाके में डोर टू डोर सर्वे किया जा रहा है, ताकि और बीमार लोगों की पहचान की जा सके। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत अस्पताल भेजा जा रहा है।

जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई

प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जांच में यदि लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सभी मरीजों की हालत स्थिर बताई जा रही है, जिससे प्रशासन ने राहत की सांस ली है।

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