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इंदौर कोर्ट से निकलते ही छलका जीतू पटवारी का दर्द, खुद को बताया वनवास भोगता नेता, BJP ने कसा सियासी तंज

मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के एक बयान ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। सोमवार को जीतू पटवारी अपने एक पुराने मामले की पेशी के सिलसिले में इंदौर कोर्ट पहुंचे थे। कोर्ट से लौटते समय उन्होंने खुद को “वनवास भोग रहा” बताया, जिसके बाद उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

कोर्ट से निकलते वक्त छलका दर्द

दरअसल, पेशी के बाद जब जीतू पटवारी कार में बैठकर न्यायालय परिसर से बाहर निकल रहे थे, तभी उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा,
“मैं तो खुद वनवास भोग रहा हूं।”
उनके इस बयान को कांग्रेस समर्थकों ने भावनात्मक प्रतिक्रिया बताया, जबकि विपक्ष ने इसे राजनीतिक ड्रामा करार दिया।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

जीतू पटवारी का यह बयान कुछ ही देर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गया। समर्थकों ने इसे संघर्ष और प्रताड़ना से जोड़कर देखा, वहीं भाजपा नेताओं ने इस पर तीखा हमला बोलना शुरू कर दिया। वीडियो के वायरल होते ही राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज हो गई।

BJP ने कसा तंज

इस पूरे मामले पर भाजपा शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कांग्रेस और जीतू पटवारी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि
“कांग्रेस के नेता जब सत्ता से दूर होते हैं, तो उन्हें लगता है कि वे वनवास में हैं।”

सुमित मिश्रा ने आगे कहा कि सत्ता में रहते हुए कांग्रेस नेताओं को जनता की याद नहीं आती, लेकिन जैसे ही सत्ता से बाहर होते हैं, तो उन्हें संघर्ष और वनवास नजर आने लगता है।

“मलाई की राजनीति” का आरोप

भाजपा नेता यहीं नहीं रुके। उन्होंने आरोप लगाया कि जब जीतू पटवारी को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था, तब उन्हें लग रहा था कि यहां “सत्ता की मलाई” मिलेगी।
मिश्रा ने कहा,
“कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को ही जीतू पटवारी ने वनवास पर भेज दिया था। उनके नेतृत्व और फैसलों से कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता आज भाजपा कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे हैं।”

कांग्रेस पर जनता से कटने का आरोप

सुमित मिश्रा ने यह भी कहा कि कांग्रेस जब सत्ता में रहती है, तब जनता से दूरी बना लेती है, और जब सत्ता से बाहर होती है, तो जनता के बीच जाने को वनवास समझने लगती है।
उनका कहना था कि लोकतंत्र में जनता के बीच रहना संघर्ष नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।

सियासत हुई और तेज

जीतू पटवारी के बयान और भाजपा की प्रतिक्रिया के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाज़ी का दौर और तेज हो गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से भी पलटवार देखने को मिल सकता है। फिलहाल यह मामला राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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