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दूषित पानी से मौतों वाले वार्ड में बाइक पर पहुंचे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महिलाओं के सवालों से बचते दिखे

इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद सियासत और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय उस वार्ड में पहुंचे, जहां दूषित पानी के कारण 11 से 15 लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन मंत्री का यह दौरा राहत और जवाबदेही की बजाय विवादों में घिर गया।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बाइक पर सवार होकर वार्ड में नजर आए। बाइक चला रहे व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि उसी क्षेत्र के पार्षद कमल वाघेला थे, जिनके वार्ड में दूषित पानी से लोगों की जान गई। मंत्री पीछे बैठे हुए थे और बिना किसी आधिकारिक वाहन या सुरक्षा घेरे के वार्ड में भ्रमण करते दिखे।

🚨 सवालों से घिरे मंत्री

मंत्री के इस दौरे का वीडियो और तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। लोगों का सवाल है कि जहां 15 जिंदगियां चली गईं, वहां बाइक पर निरीक्षण करना क्या हालात की गंभीरता को दर्शाता है?

सबसे ज्यादा विवाद तब बढ़ा जब स्थानीय महिलाएं मंत्री को घेरकर अपनी पीड़ा और गुस्सा जाहिर करने लगीं। महिलाओं ने साफ कहा कि दूषित पानी की शिकायतें पहले भी की गई थीं, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की।

😶 महिलाओं की आवाज़ सुनना भी भारी पड़ा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब महिलाओं ने मंत्री से सवाल किए और सच्चाई सामने रखने की कोशिश की, तो मंत्री कैलाश विजयवर्गीय असहज हो गए। वह कुछ पल के लिए रुके जरूर, लेकिन फिर आगे बढ़ गए और महिलाओं की बात पूरी तरह सुने बिना ही निकल गए

यह दृश्य लोगों को और ज्यादा आक्रोशित कर गया। महिलाओं का कहना था कि जिनके घरों में मौतें हुईं, उनकी पीड़ा सुनने का धैर्य भी जनप्रतिनिधियों में नहीं है।

🏙️ पार्षद की भूमिका पर भी सवाल

इस पूरे मामले में पार्षद कमल वाघेला की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जिस वार्ड में दूषित पानी से मौतें हुईं, उसी वार्ड के पार्षद मंत्री को बाइक पर घुमा रहे थे। सवाल उठ रहा है कि क्या जिम्मेदारी तय करने की बजाय बचाव का प्रयास किया जा रहा है?

⚖️ जवाबदेही की मांग

स्थानीय लोगों और विपक्ष का कहना है कि

  • सिर्फ दौरे और प्रतीकात्मक दिखावे से काम नहीं चलेगा

  • मौतों की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए

  • दोषी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर कड़ी कार्रवाई हो

  • पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए

इंदौर जैसे “सबसे स्वच्छ शहर” के दावे पर भी अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूषित पानी से हुई मौतों ने व्यवस्था की असल तस्वीर उजागर कर दी है।

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