भागीरथपुरा जल त्रासदी: 15 मौतों के बाद बड़ा एक्शन, सीएम मोहन यादव ने इंदौर नगर निगम पर कसी नकेल

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में इंदौर नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव को पद से हटाकर मंत्रालय में पदस्थ किया गया है।
मुख्यमंत्री का सख्त संदेश
2 जनवरी, शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए थे। पहले चरण में संबंधित अधिकारियों को हटाने और कलेक्टर को नोटिस जारी किया गया, लेकिन देर शाम मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीधे निलंबन के आदेश जारी कर दिए। इससे साफ संकेत मिला कि सरकार जनस्वास्थ्य से जुड़ी लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।
आयुक्त बदले, मंत्रालय भेजे गए
मुख्यमंत्री के निर्देश पर इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव को उनके पद से हटाकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव के रूप में पदस्थ किया गया है। सरकार का मानना है कि इतने बड़े जनस्वास्थ्य संकट में प्रशासनिक नेतृत्व की भूमिका बेहद अहम होती है, और इसी जिम्मेदारी के तहत यह निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का बयान
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट कहा कि,
“जनस्वास्थ्य सरकार के लिए सर्वोपरि है। साफ पेयजल उपलब्ध कराना हमारी जिम्मेदारी है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
उन्होंने प्रदेश के सभी नगर निगमों को निर्देश दिए हैं कि स्वच्छ पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इसके लिए SOP (Standard Operating Procedure) भी जारी कर दी है।
डायरिया का कहर, 15 की मौत
भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैले डायरिया ने इंदौर को झकझोर कर रख दिया है। दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुई इस त्रासदी में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 5 महीने का एक मासूम बच्चा भी शामिल है। इसके अलावा 200 से अधिक लोग अस्पतालों में भर्ती हैं और सैकड़ों अन्य बीमार बताए जा रहे हैं।
लगातार आठ वर्षों से देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाले इंदौर में इस घटना ने जल आपूर्ति व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मानवाधिकार आयोग भी सक्रिय
इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताया है। आयोग ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि शहरी जल संरचना में गहरी खामियों का संकेत है। विशेषज्ञों के अनुसार, सीवेज और पेयजल लाइनों के आपसी संपर्क ने इस त्रासदी को जन्म दिया।
इलाके में डर का माहौल
भागीरथपुरा और आसपास के क्षेत्रों में अब भी भय और अनिश्चितता बनी हुई है। कई परिवारों ने नल का पानी पीना बंद कर दिया है और बाहर से पानी मंगवाया जा रहा है। डॉक्टर लगातार मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जबकि लोग प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।





