इंदौर प्रॉपर्टी मार्केट सुस्ती: ₹54 करोड़ राजस्व कम

Dainik R Times
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साल के सबसे व्यस्त माने जाने वाले जनवरी से मार्च तिमाही में इस बार इंदौर प्रॉपर्टी मार्केट सुस्ती साफ दिखाई दे रही है। आमतौर पर इस अवधि में रजिस्ट्रार कार्यालयों में अतिरिक्त स्लॉट और देर रात तक काम होता है। हालांकि इस बार हालात उलट हैं।

दरअसल जनवरी महीने में पंजीयन प्रक्रिया में 8% से अधिक गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही सरकारी राजस्व में भी भारी कमी आई है।

सबसे बड़ा झटका इंदौर-1 (मोती तबेला) पंजीयन कार्यालय को लगा है। यहां राजस्व में 10% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।

इंदौर प्रॉपर्टी मार्केट सुस्ती: आंकड़ों में तस्वीर

जनवरी 2025 में जहां ₹525 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ था, वहीं जनवरी 2026 में यह घटकर ₹471 करोड़ रह गया।

👉 सीधा नुकसान: लगभग ₹54 करोड़
👉 रजिस्ट्रियां: 17,247 से घटकर 15,849

इससे साफ है कि प्रॉपर्टी खरीदारों और निवेशकों की सक्रियता में कमी आई है।


किन क्षेत्रों में गिरावट, कहां दिखी बढ़त?

हालांकि पूरे शहर की स्थिति एक जैसी नहीं है।

कार्यालय राजस्व स्थिति रुझान
इंदौर-1 -10.28% सबसे ज्यादा गिरावट
इंदौर-2 +1.30% लगभग स्थिर
इंदौर-3 +11.65% मध्यम बढ़त
इंदौर-4 +19.67% सबसे ज्यादा वृद्धि

दूसरी ओर नए विकसित इलाकों में अभी भी निवेश बना हुआ है।


सुस्ती के पीछे क्या कारण?

विशेषज्ञों के अनुसार दो मुख्य कारण सामने आ रहे हैं:

  • सोने की कीमतों में लगातार तेजी

  • प्रीमियम प्रॉपर्टी में निवेशकों की कम रुचि

सोना इस समय सुरक्षित और लिक्विड निवेश विकल्प के रूप में उभरा है। इसलिए कई निवेशकों ने रियल एस्टेट की जगह गोल्ड को प्राथमिकता दी है।


क्या फरवरी-मार्च में बदलेगी तस्वीर?

हालांकि पूरे वित्तीय वर्ष (अप्रैल से जनवरी) के आंकड़े बताते हैं कि कुल रजिस्ट्रियां अभी भी पिछले वर्ष से हल्की बढ़त में हैं।

अब सवाल यह है कि क्या मार्च में नई कलेक्टर गाइडलाइन से पहले पेंडिंग रजिस्ट्रियों में तेजी आएगी?

विभाग को उम्मीद है कि आने वाले दो महीनों में बाजार में रौनक लौट सकती है।

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