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भूमि स्वामित्व योजना: 46 लाख संपत्ति रजिस्ट्री का खर्च उठाएगी सरकार

भूमि स्वामित्व योजना: 46 लाख संपत्ति रजिस्ट्री का खर्च उठाएगी सरकार

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भूमि स्वामित्व योजना के तहत 46 लाख ग्रामीणों को राहत

भूमि स्वामित्व योजना को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। दरअसल भूमि स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश के करीब 46 लाख ग्रामीणों की संपत्ति रजिस्ट्री का स्टांप शुल्क अब राज्य सरकार खुद वहन करेगी।

मंगलवार को भोपाल में मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। इस फैसले से ग्रामीणों को आर्थिक राहत मिलेगी और संपत्ति के दस्तावेज़ बनवाना आसान होगा।

हालांकि इस योजना के कारण सरकार पर लगभग 3000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा।


कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले

कैबिनेट बैठक की जानकारी देते हुए मंत्री Chaitanya Kashyap ने बताया कि सरकार ने सुशासन से जुड़े एक नए कार्यक्रम को भी मंजूरी दी है।

इसके तहत “सीएम यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम” शुरू किया जाएगा।

कार्यक्रम से जुड़े मुख्य बिंदु:

  • हर विकासखंड से 15 युवाओं का चयन

  • कुल 4865 युवाओं की नियुक्ति

  • युवाओं को 10,000 रुपये मासिक मानदेय

  • एक वर्ष के अनुबंध पर कार्य

इन युवाओं की जिम्मेदारी सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति का फीडबैक तैयार करना होगी।


युवाओं के जरिए योजनाओं की निगरानी

दरअसल सरकार का उद्देश्य यह जानना है कि सरकारी योजनाएं जमीन पर कितनी प्रभावी हैं।

इसी कारण चुने गए युवा अपने-अपने विकासखंड में जाकर योजनाओं की प्रगति का अध्ययन करेंगे।

मुख्य जिम्मेदारियां:

  • योजनाओं की जमीनी स्थिति का मूल्यांकन

  • नागरिकों से फीडबैक लेना

  • रिपोर्ट तैयार कर शासन तक भेजना

यह रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय और संबंधित विभागों तक पहुंचाई जाएगी।

इस कार्यक्रम के लिए लगभग 170 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।


भूमि स्वामित्व योजना क्या है

भूमि स्वामित्व योजना ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के अधिकार को स्पष्ट करने के लिए शुरू की गई थी।

यह योजना केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा 2020 में शुरू की गई थी।

योजना की प्रमुख विशेषताएं:

  • गांवों में ड्रोन सर्वे के जरिए जमीन का सीमांकन

  • ग्रामीणों को प्रॉपर्टी कार्ड प्रदान करना

  • भूमि विवादों में कमी

  • बैंक से लोन लेने में सुविधा

इस योजना से ग्रामीण संपत्ति का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार होता है।


सात विभागों की योजनाएं 2031 तक जारी

कैबिनेट ने कई अन्य विभागों की योजनाओं को भी आगे बढ़ाने का फैसला किया।

मुख्य विभाग:

  • ऊर्जा विभाग

  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग

  • महिला एवं बाल विकास विभाग

  • जनजातीय कार्य विभाग

इन योजनाओं को 2031 तक जारी रखने के लिए करीब 33,240 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।

इसके अलावा सरकार ने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक जिला–एक उत्पाद योजना के तहत 37.50 करोड़ रुपये की डीपीआर को भी मंजूरी दी है।


स्वास्थ्य और न्याय व्यवस्था से जुड़े फैसले

कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य और न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी निर्णय लिए गए।

महत्वपूर्ण फैसले:

  • मैहर, कैमोर और निमरानी में तीन नए ESIC औषधालय

  • डॉक्टर और स्टाफ के 51 पद सृजित

  • सिंगरौली के चितरंगी में व्यवहार न्यायालय की स्थापना

इन फैसलों से क्षेत्रीय स्वास्थ्य सुविधाओं और न्यायिक सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।


इससे पहले पढ़ें:
मध्यप्रदेश में सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति पर विशेष रिपोर्ट

इस मामले में विस्तृत अपडेट देखें:
ग्रामीण विकास और पंचायत योजनाओं का बजट विश्लेषण


स्रोत:
Government of Madhya Pradesh
https://mp.gov.in

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