Dayara Movie Review: करीना-पृथ्वीराज की फिल्म कैसी है? जानिए कहानी, एक्टिंग और फैसला
Dayara Movie Review: करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन पहली बार स्क्रीन शेयर कर रहे हैं। मेघना गुलजार की क्राइम थ्रिलर ‘दायरा’ 18 सितंबर 2026 को रिलीज हुई है।
फिल्म की कहानी एक लड़की की हत्या और चार आरोपियों के एनकाउंटर से शुरू होती है। इसके बाद सवाल उठता है कि यह न्याय था या कानून से आगे बढ़ने का फैसला।
‘दायरा’ 2019 के हैदराबाद रेप-मर्डर केस और उसके बाद हुए पुलिस एनकाउंटर से प्रेरित है। हालांकि, फिल्म ने वास्तविक घटना को हूबहू नहीं दोहराया है।
कहानी में काल्पनिक किरदार और परिस्थितियां जोड़ी गई हैं। इसी वजह से फिल्म शुरुआत में दर्शकों की उत्सुकता बनाए रखती है।
रेटिंग: 2.5/5
अवधि: 2 घंटे 23 मिनट
शैली: क्राइम थ्रिलर / इन्वेस्टिगेटिव ड्रामा
निर्देशक: मेघना गुलजार
मुख्य कलाकार: करीना कपूर खान, पृथ्वीराज सुकुमारन, क्षिती जोग, कंवलजीत सिंह, जितेंद्र जोशी
रिलीज डेट: 18 सितंबर 2026
Dayara Movie Review: कहानी क्या है?
सबसे पहले कहानी रागिनी (प्रगति मिश्रा) से शुरू होती है। वह एक रात हाईवे के पास मुसीबत में फंस जाती है।
इसके बाद रागिनी गायब हो जाती है। अगले दिन उसका जला हुआ शव मिलने से मामला गंभीर हो जाता है।
रागिनी की मां पार्वती (क्षिती जोग) और भाई कबीर (भावेश बब्बानी) पुलिस से मदद मांगते हैं। हालांकि, शुरुआती जांच का तरीका आगे की कहानी की नींव बनता है।
मामला मीडिया में आने के बाद जांच डीसीपी रमन कुमार (पृथ्वीराज सुकुमारन) को मिलती है। रमन अपनी टीम के साथ चार आरोपियों को पकड़ लेता है।
लेकिन अदालत तक मामला पहुंचने से पहले चारों आरोपी पुलिस एनकाउंटर में मारे जाते हैं। पुलिस का दावा रहता है कि आरोपियों ने भागने और हमला करने की कोशिश की थी।
यहीं से कहानी का असली संघर्ष शुरू होता है। एक तरफ जनता रमन को न्याय दिलाने वाला अधिकारी मानती है।
वहीं दूसरी तरफ एनकाउंटर की सच्चाई पर सवाल उठते हैं। इसके बाद डीसीपी अजूनी कोहली (करीना कपूर खान) के नेतृत्व में विशेष जांच टीम बनाई जाती है।
अजूनी को एनकाउंटर की पूरी कड़ी की जांच करनी है। इसके साथ ही उसे रागिनी की मौत से जुड़े सवालों के जवाब भी तलाशने हैं।
Dayara Movie Review: पृथ्वीराज की एक्टिंग कैसी है?
सबसे पहले पृथ्वीराज सुकुमारन रमन कुमार के किरदार में मजबूत नजर आते हैं। उनके किरदार में पुलिस अधिकारी का रौब साफ दिखाई देता है।
हालांकि, रमन सिर्फ एक सख्त पुलिस अधिकारी नहीं है। वह अपने फैसलों को सही मानने वाला व्यक्ति भी है।
पृथ्वीराज ने इस किरदार को ज्यादा शोर के बिना निभाया है। उनकी आंखों और संवाद बोलने का अंदाज किरदार में वजन जोड़ता है।
यही वजह है कि रमन पूरी तरह विलेन जैसा नहीं लगता। यह संतुलन फिल्म के लिए काफी जरूरी है।
Dayara Movie Review: करीना कपूर का किरदार कैसा है?
वहीं करीना कपूर खान डीसीपी अजूनी कोहली की भूमिका में हैं। उनका किरदार शांत और व्यवस्थित तरीके से जांच करता है।
अजूनी चमक-दमक वाली फिल्मी पुलिस अधिकारी नहीं है। वह सवाल पूछती है और छोटी विसंगतियों पर ध्यान देती है।
करीना ने किरदार को नियंत्रित अंदाज में निभाया है। हालांकि, इस भूमिका में जितनी संभावनाएं थीं, फिल्म उनका पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाती।
यही बात किरदार के प्रभाव को कुछ जगह सीमित कर देती है।
क्षिती जोग ने छोड़ी मजबूत छाप
इसके अलावा क्षिती जोग पार्वती के किरदार में प्रभावशाली हैं। रागिनी की मां का दर्द उनके अभिनय में खामोशी के जरिए सामने आता है।
फिल्म के सबसे मानवीय हिस्सों में उनका किरदार प्रमुख है। बाकी कलाकार भी कहानी को विश्वसनीय बनाने में मदद करते हैं।
Dayara Movie Review: मेघना गुलजार का निर्देशन कैसा है?
सबसे पहले मेघना गुलजार फिल्म को सिर्फ अपराध की कहानी नहीं बनातीं। वह जांच के साथ न्याय और कानून का सवाल भी सामने रखती हैं।
फिल्म का पहला हिस्सा ज्यादा प्रभावी है। घटनाएं धीरे-धीरे खुलती हैं और दर्शक लगातार सच्चाई जानना चाहता है।
हालांकि, इंटरवल के बाद कहानी की गति कुछ कम हो जाती है। कई जगह फिल्म जरूरत से ज्यादा चीजों को समझाने लगती है।
यहीं से इसकी पकड़ कमजोर होने लगती है। शुरुआत में बना तनाव दूसरे हिस्से में उसी स्तर पर कायम नहीं रहता।
Dayara Movie Review: कहानी और स्क्रीनप्ले में क्या कमी है?
वहीं फिल्म का मूल विचार काफी मजबूत है। इसका मुख्य सवाल है कि तेज न्याय और सही न्याय में अंतर क्या है।
अगर सिस्टम धीमा हो, तो क्या पुलिस कानून अपने हाथ में ले सकती है? अगर आरोपी अदालत तक पहुंचने से पहले मारे जाएं, तो क्या उसे न्याय कहा जा सकता है?
फिल्म इन सवालों को उठाती है। हालांकि, कुछ जगह इन सवालों पर ज्यादा गहराई से जाने की जरूरत महसूस होती है।
स्क्रीनप्ले का पहला हिस्सा चुस्त है। लेकिन दूसरे हिस्से में कुछ दृश्य खिंचे हुए लगते हैं।
कई बार कहानी एक ही बात को अलग तरीके से समझाती हुई महसूस होती है। इससे थ्रिलर का प्रभाव कम होता है।
Dayara Movie Review: क्लाइमैक्स कैसा है?
सबसे बड़ी कमी फिल्म का क्लाइमैक्स है। इतनी गंभीर कहानी के बाद दर्शक मजबूत टकराव की उम्मीद करता है।
लेकिन अंत उस स्तर का प्रभाव पैदा नहीं कर पाता। कई सवाल उठाने के बाद फिल्म का निष्कर्ष थोड़ा अधूरा महसूस होता है।
यही कारण है कि ‘दायरा’ अच्छी फिल्म बनने के करीब पहुंचकर भी पूरी तरह यादगार नहीं बन पाती।
फिल्म का तकनीकी पक्ष
इसके अलावा फिल्म का कैमरा वर्क इसके मूड को अच्छी तरह सपोर्ट करता है। बंद फ्रेम और क्लोज-अप्स किरदारों का तनाव बढ़ाते हैं।
एडिटिंग पहले हिस्से में प्रभावी है। हालांकि, इंटरवल के बाद फिल्म को और चुस्त किया जा सकता था।
बैकग्राउंड स्कोर भी तनाव वाले दृश्यों में असर पैदा करता है। फिल्म का संगीत इसका मुख्य आकर्षण नहीं है।
Dayara Movie Review: फिल्म में सबसे बड़ी कमियां
सबसे बड़ी कमी कमजोर दूसरा हिस्सा है। इसके बाद क्लाइमैक्स भी फिल्म की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता।
फिल्म जिस सवाल के साथ शुरुआत करती है, उसका जवाब देते समय कई जगह ज्यादा समझाने लगती है।
इससे कहानी का नैचुरल फ्लो प्रभावित होता है। नतीजा यह है कि पहला हिस्सा जितना प्रभावी लगता है, दूसरा हिस्सा उतना असर नहीं छोड़ता।
Dayara Movie Review: फाइनल वर्डिक्ट
अंत में ‘दायरा’ में मजबूत सवाल, अच्छे कलाकार और प्रभावी शुरुआत है। पृथ्वीराज सुकुमारन और करीना कपूर खान अपने किरदारों को गंभीरता से निभाते हैं।
मेघना गुलजार का निर्देशन भी कई हिस्सों में असरदार है। लेकिन कमजोर दूसरा हिस्सा और फीका क्लाइमैक्स फिल्म को पीछे खींचते हैं।
अगर आपको क्राइम थ्रिलर और इन्वेस्टिगेटिव ड्रामा पसंद है, तो फिल्म का पहला हिस्सा दिलचस्प लग सकता है। हालांकि, पूरी फिल्म से बहुत मजबूत क्लाइमैक्स की उम्मीद रखने वाले दर्शकों को निराशा हो सकती है।
रेटिंग: ⭐⭐½/5

