Vote Chori controversy ने देश की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई। ये आपत्तियां मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर थीं।
रिपोर्ट के अनुसार ये आपत्तियां SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन से जुड़े आदेशों पर थीं। इन आदेशों की जानकारी सभी तीनों आयुक्तों को नहीं दी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि आपत्तियां कई अहम मुद्दों पर थीं। इनमें नए मतदाताओं का पंजीकरण, नाम काटना और बहाल करना शामिल था। फॉर्म 6 में बदलाव और मतदाता सूची के डेटाबेस के केंद्रीकरण पर भी सवाल उठे थे।
मई में विवेक जोशी ने फॉर्म 6 में बदलाव के तरीके पर सवाल उठाया था। इसके बाद अगस्त में सुखबीर सिंह संधू ने इस बदलाव को “unauthorised and illegal” कहा। उन्होंने इसे तुरंत हटाने की मांग की।
Vote Chori controversy पर विपक्ष के तीखे आरोप
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, “Vote chori is a crime against the Indian people and a direct attack on our constitution. The BJP, RSS and EC who organised it have committed an act of treason. Justice will be served.” उन्होंने कहा कि वोट चोरी भारतीय जनता के खिलाफ अपराध है।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने सीईसी ज्ञानेश कुमार को इस मामले का “mastermind” बताया। उन्होंने सीईसी की गिरफ्तारी और sedition (देशद्रोह) के तहत मुकदमा चलाने की मांग की। साथ ही केजरीवाल ने हालिया चुनाव रद्द करने की मांग की। उन्होंने दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में दोबारा मतदान कराने को कहा।
शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बैलेट पेपर से दोबारा चुनाव की मांग की। यह मांग महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के लिए रखी गई। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केरल में कहा, “If the Election Commissioner is not only aware of it but also allowing it to happen, then it is a very serious assault on democracy. It is an act of treason.” उन्होंने लोकतंत्र के लिए इसे बेहद गंभीर मुद्दा बताया।
चुनाव आयोग की सफाई: सभी फैसले सर्वसम्मति से
दूसरी ओर, चुनाव आयोग के सूत्रों ने आंतरिक दरार की खबरों को खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR समेत सभी फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग का कहना है कि हर फैसले में दोनों चुनाव आयुक्तों और सीईसी की सहमति शामिल थी।
विपक्ष के आरोपों और आयोग की सफाई के बीच यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक अब 4 राज्यों में 23 अक्टूबर को होने वाले MLC चुनाव पर भी सबकी नजर है। वहीं हाल में कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर उठा विवाद पहले से ही राजनीति को गरमा रहा है। इसलिए चुनावी पारदर्शिता पर बहस और तेज होने के आसार हैं।

