नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के एक विवादास्पद फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के प्रयास के दोषी को बरी कर दिया था।
सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने बुधवार को यह कार्रवाई की। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं।
पीठ ने कहा कि फैसले में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं। बिहार के महाधिवक्ता एस.डी. संजय को आरोपी पर नोटिस तामील कराने का निर्देश दिया गया है। यह तामील स्थानीय पुलिस के माध्यम से होगी।
मामला Suo Moto Writ Petition (Criminal) No. 5 of 2026 के रूप में दर्ज किया गया है। इसमें Patna High Court के 9 जुलाई 2026 के आदेश को चुनौती दी गई है।
Supreme Court suo motu: पूरा मामला क्या है
मामला वर्ष 2008 का है। केस बांका जिले के अमरपुर थाने में दर्ज हुआ था। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को IPC की धारा 376/511 और 342 के तहत दोषी ठहराया था।
लेकिन पटना हाईकोर्ट ने 9 जुलाई 2026 के फैसले में आरोपी को बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने माना कि महिला की सलवार उतारने का प्रयास और छेड़छाड़ दुष्कर्म के प्रयास को साबित नहीं करती।
हाईकोर्ट के अनुसार ये कृत्य अधिकतम IPC की धारा 354 के दायरे में आते हैं। धारा 354 महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के अपराध से जुड़ी है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन टिप्पणियों पर गंभीर चिंता जताई है। सीजेआई ने सुनवाई के दौरान कहा, “There are some offending observations”।
शीर्ष अदालत आरोपी की सुनवाई के बाद ही इन टिप्पणियों को रद्द करने पर कोई फैसला लेगी। इसलिए आरोपी को नोटिस जारी किया गया है और अगली सुनवाई की प्रतीक्षा है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले पर भी स्वतः संज्ञान ले चुका है। वह मामला भी दुष्कर्म के प्रयास की परिभाषा से जुड़ा था।
वरिष्ठ वकीलों ने पटना हाईकोर्ट के फैसले की ओर बेंच का ध्यान दिलाया था। इसके बाद सीजेआई के निर्देश पर नया मुकदमा दर्ज किया गया।
अब सभी की नजर आगे की सुनवाई पर टिकी है। सुप्रीम कोर्ट की यह कार्रवाई यौन अपराध के मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता पर बड़ी बहस छेड़ सकती है।

