NCLT CBI notice Subhash Chandra मामले में एक अहम मोड़ आया है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की पांच-सदस्यीय विशेष बेंच ने बुधवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी किया है। ट्रिब्यूनल ने CBI से चार हफ्ते में जवाब मांगा है।
यह मामला Zee Entertainment के संस्थापक सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत गारंटी वाली दिवालियापन प्रक्रिया से जुड़ा है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि CBI एक ऐसे धोखाधड़ी मामले की जांच कर रही है, जिसका इस मामले पर सीधा असर पड़ता है। इसलिए CBI का जवाब जरूरी है।
₹6.25 करोड़ बनाम ₹22,006 करोड़ के दावे
चंद्रा ने निजी गारंटर के तौर पर करीब 6.25 करोड़ रुपये की पुनर्भुगतान योजना पेश की है। लेकिन ऋणदाताओं के स्वीकार किए गए दावे 22,006.57 करोड़ रुपये हैं। इस विशाल अंतर के कारण कई ऋणदाताओं ने योजना का कड़ा विरोध किया है।
इस महीने की शुरुआत में CBI ने चंद्रा, कई कंपनियों और उनके निदेशकों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। आरोप है कि उन्होंने LIC Housing Finance से कर्ज लेने के लिए अपनी नेटवर्थ बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई। कर्ज बाद में डूब गया और सार्वजनिक क्षेत्र के ऋणदाता को 1,322 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ। LIC Housing Finance इस दिवालियापन मामले के ऋणदाताओं में से एक है।
प्लान पर रोक और संपत्ति पर पाबंदी जारी
NCLT की विशेष बेंच पहले ही 25 अगस्त के उस आदेश पर रोक लगा चुकी है, जिसमें टाई-ब्रेकर जज ने चंद्रा की योजना को मंजूरी दी थी। बेंच ने कहा कि यह रोक अंतिम फैसला होने तक जारी रहेगी।
इसके अलावा, ट्रिब्यूनल ने चंद्रा को अपनी संपत्ति बेचने, ट्रांसफर करने या किसी तरह से निपटाने से भी रोक दिया है। यह पाबंदी कार्यवाही चलने तक लागू रहेगी। बेंच ने सभी पक्षों को अपनी दलीलें और दस्तावेज व्यवस्थित रूप में दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई में सभी पक्षों को सुना जाएगा।
NCLAT में भी लड़ाई
यह विवाद अब अपीलीय ट्रिब्यूनल NCLAT तक भी पहुंच गया है। चंद्रा ने NCLT के 1 सितंबर के संपत्ति-रोक आदेश के खिलाफ अपील दायर की है। NCLAT ने उन्हें ऋणदाताओं को याचिका की प्रतियां देने का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई 29 सितंबर को तय की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि CBI जांच का नतीजा इस मामले की दिशा तय कर सकता है। अगर जांच में आरोप साबित होते हैं तो चंद्रा की पुनर्भुगतान योजना को बड़ा झटका लग सकता है। फिलहाल दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही ट्रिब्यूनल कोई अंतिम फैसला लेगा।
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स्रोत: Informist report

