भारतीय बीमा नियामक IRDAI ने बीमा पॉलिसियों पर मिलने वाले कमीशन को लेकर बड़ा सुधार प्रस्ताव रखा है। IRDAI insurance reform के इस चर्चा-पत्र में लाइफ, हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस में एजेंटों, ब्रोकरों और बैंकों को मिलने वाले कमीशन पर सीमा लगाने का प्रस्ताव है। नियामक का कहना है कि इससे पॉलिसी की लागत घटेगी और सीधा फायदा ग्राहकों को मिलेगा।
यह चर्चा-पत्र बुधवार देर रात जारी किया गया। इसके तहत कमीशन को प्रोडक्ट की जटिलता और उसे बेचने में लगने वाली मेहनत से जोड़ा जाएगा। साधारण या अनिवार्य बीमा कवर पर कम कमीशन मिलेगा, जबकि जटिल प्रोडक्ट बेचने पर ज्यादा।
हेल्थ इंश्योरेंस में पहली बार पॉलिसी लेने पर वितरकों को 15 से 20 प्रतिशत तक कमीशन देने का प्रस्ताव है। रिन्यूअल और दूसरी कंपनी में पोर्ट कराने पर कमीशन 5 से 10 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। मोटर इंश्योरेंस में पर्सनल एक्सीडेंट कवर पर 5 से 10 प्रतिशत कमीशन का प्रस्ताव है।
लाइफ इंश्योरेंस में पहले साल का कमीशन पॉलिसी की अवधि के हिसाब से 5 से 20 प्रतिशत के बीच तय होगा। इसके अलावा लाइफ कमीशन का भुगतान सिर्फ पहले साल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बाद के सालों में भी बांटा जाएगा। इससे एजेंट पॉलिसी बेचकर ग्राहक को भूल नहीं पाएंगे।
IRDAI insurance reform: बैंक और लोन से जुड़े बीमा पर सख्ती
बैंकों और कर्ज देने वाली कंपनियों पर सबसे सख्त प्रस्ताव है। लोन के साथ बीमा बेचने पर बैंक सिर्फ 2 से 5 प्रतिशत कमीशन पाएंगे। इसके साथ ही लोन के साथ बीमा की जबरन बंडलिंग पर पूरी रोक का प्रस्ताव है। थर्ड-पार्टी मोटर जैसे अनिवार्य कवर पर लगभग कोई कमीशन नहीं मिलेगा।
दरअसल 2023 में कमीशन की सीमा हटाए जाने के बाद बीमा कंपनियों की वितरण लागत तेजी से बढ़ी थी। IRDAI का कहना है कि यह लागत अंत में ग्राहकों के प्रीमियम में जुड़ती है। इसी साल सरकार ने बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति भी दी है। रॉयटर्स के अनुसार नियामक ने जुलाई में ही मिस-सेलिंग रोकने के लिए सुधार की योजना बनाई थी।
नियामक ने 25 अक्टूबर तक सभी पक्षों से सुझाव मांगे हैं। इसके बाद प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा। ग्राहकों के लिए सलाह यह है कि पॉलिसी लेते समय कमीशन और छिपे हुए चार्ज की जानकारी जरूर पूछें।

