Indore Jhanki Tradition: 100 साल से कायम विरासत

Dainik R Times
6 Min Read

Indore Jhanki Tradition: मिलें बंद, पर नहीं रुकी 100 साल पुरानी परंपरा

Indore Jhanki Tradition: इंदौर की अनंत चतुर्दशी झांकियां शहर की पहचान हैं।
यह परंपरा मिल मजदूरों और कारीगरों की मेहनत से आगे बढ़ी।

इस साल भी बंद मिल परिसरों में झांकियां तैयार हुई हैं।
वहीं कारीगरों ने पुरानी कला को नई तकनीक से जोड़ा है।

Indore Jhanki Tradition की शुरुआत कैसे हुई?

इसके बाद (Then), इंदौर की इस परंपरा का इतिहास देखें।
उपलब्ध रिपोर्टों में इसकी शुरुआत 1923 के आसपास बताई गई है।

हुकुमचंद मिल से झांकी निकालने की परंपरा शुरू हुई थी।
बाद में दूसरी मिलों ने भी इसमें भाग लेना शुरू किया।

समय के साथ यह आयोजन शहर की पहचान बन गया।
वहीं मिल मजदूर इसके निर्माण का प्रमुख हिस्सा रहे।

पहले झांकियों में गैस बत्तियों से रोशनी की जाती थी।
इसके बाद बिजली, जनरेटर और मशीनों का इस्तेमाल बढ़ा।

आज चलित पुतलों और आधुनिक लाइटिंग का भी इस्तेमाल होता है।
इस तरह पुरानी परंपरा का स्वरूप लगातार बदलता गया।

मिलें बंद हुईं, लेकिन कारीगरों ने काम नहीं छोड़ा

हालांकि (However), कपड़ा मिलों के बंद होने से मुश्किलें बढ़ीं।
पहले निर्माण सामग्री मिल परिसरों से आसानी से मिल जाती थी।

अब कारीगरों को लकड़ी, लोहा और दूसरे सामान खरीदने पड़ते हैं।
इससे झांकी निर्माण की लागत भी बढ़ी है।

फिर भी कारीगर हर साल नया काम करने की कोशिश करते हैं।
कई परिवारों में यह कला पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है।

कारीगरों के लिए यह काम केवल रोजगार नहीं है।
वहीं इसे शहर की सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ा जाता है।

झांकी निर्माण में अब हाइड्रोलिक और गियरबॉक्स

इसके अलावा (Also), तकनीक ने झांकियों का स्वरूप बदल दिया है।
इस साल तैयार झांकियों में हाइड्रोलिक सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है।

ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, एक झांकी करीब 80 फीट लंबी है।
इसके कुछ हिस्से हाइड्रोलिक सिस्टम से करीब 25 फीट ऊपर उठते हैं।

झांकी में नए गियरबॉक्स का इस्तेमाल भी किया गया है।
इससे चलित हिस्सों को संचालित करने में मदद मिलती है।

मशीनों से निर्माण का काम कुछ आसान हुआ है।
वहीं तकनीकी उपकरणों से खर्च भी बढ़ा है।

4 से 5 लाख तक पहुंची झांकी की लागत

इसके बाद (Then), निर्माण लागत की तस्वीर सामने आती है।
कारीगरों के अनुसार, एक बड़ी झांकी पर लाखों रुपये खर्च होते हैं।

इस साल लागत करीब 4 से 5 लाख रुपये तक पहुंच रही है।
सामग्री, मशीन और बिजली उपकरण इसका बड़ा हिस्सा हैं।

पहले मिलों से कुछ सामग्री उपलब्ध हो जाती थी।
अब अधिकांश सामान बाजार से खरीदना पड़ता है।

इसके बावजूद कारीगर काम रोकने को तैयार नहीं हैं।
उनके लिए हर साल नई झांकी बनाना परंपरा का हिस्सा है।

जगन्नाथ रथ और मधु-कैटभ वध की थीम

वहीं (Meanwhile), इस साल धार्मिक कथाओं को भी जगह मिली है।
एक झांकी में जगन्नाथ रथ की थीम रखी गई है।

दूसरी झांकी में मधु-कैटभ वध का प्रसंग दिखाया गया है।
चलित पुतलों और मशीनों से इन दृश्यों को तैयार किया गया है।

धार्मिक विषयों के साथ तकनीकी प्रस्तुति भी जोड़ी गई है।
इससे पारंपरिक झांकी का आधुनिक रूप सामने आता है।

IDA और नगर निगम की मदद के बीच कारीगरों की मेहनत

इसके अलावा (In addition), झांकी निर्माण में संस्थागत सहयोग भी मिलता है।
ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, IDA और नगर निगम से सीमित मदद मिलती है।

बाकी खर्च और निर्माण की जिम्मेदारी कारीगरों पर रहती है।
सामग्री की बढ़ती कीमतों के बीच यह काम चुनौतीपूर्ण है।

फिर भी कारीगर अपनी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
वहीं बंद मिलों की पहचान इन झांकियों में दिखाई देती है।

Indore Jhanki Tradition आज भी क्यों खास है?

अंततः (Finally), यह परंपरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है।
इसके साथ इंदौर के मिल मजदूरों का इतिहास जुड़ा है।

बंद मिलों के बाद भी झांकियां शहर में निकल रही हैं।
कारीगरों की मेहनत इस परंपरा को लगातार आगे बढ़ा रही है।

2026 में भी हुकुमचंद और राजकुमार मिल से जुड़ी झांकियां शामिल हैं।
इसके साथ कल्याण, मालवा और स्वदेशी मिलों की झांकियां भी रहेंगी।

इस तरह इंदौर की झांकियां पुरानी और नई तकनीक जोड़ रही हैं।
यही वजह है कि यह परंपरा आज भी शहर की पहचान बनी हुई है।

  1. Indore Jhanki Marg: झांकी मार्ग की तैयारियां — इसी विषय पर पहले प्रकाशित खबर।
  2. Khajrana Ganesh Mandir: 10 दिवसीय गणेश उत्सव — गणेश उत्सव से जुड़ी स्थानीय खबर।
  3. Ganesh Chaturthi: मरी माता गणेश मंदिर — इंदौर के गणेश उत्सव से जुड़ी खबर।
  4. Indore News — Dainik Rajeev Times — इंदौर की अन्य स्थानीय खबरें।

  1. अनंत चतुर्दशी — जिला इंदौर, मध्यप्रदेश शासन — जिला प्रशासन द्वारा झांकी परंपरा और मार्ग की जानकारी।
  2. Times of India — 103-year-old Anant Chaturdashi tableau procession — 2026 के समारोह और मिलों से जुड़ी झांकियों का विवरण।
  3. Navbharat Live — इंदौर की 100 साल से ज्यादा पुरानी झांकी परंपरा — कारीगरों और तकनीकी बदलावों पर विशेष रिपोर्ट।
  4. Free Press Journal — Indore Anant Chaturdashi 2026 — 2026 की झांकियों और प्रशासनिक व्यवस्था की जानकारी।
Share This Article