मध्यप्रदेश में बिजली संकट को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार को दावा किया कि प्रदेश के कई गांवों में लगातार तीन-चार दिनों से बिजली नहीं आ रही है। इसके जवाब में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मांग बढ़ने के कारण कुछ जगहों पर परेशानी हुई है, लेकिन एक-दो दिन में स्थिति सामान्य हो जाएगी।
पटवारी ने सरकार पर बिजली कटौती, महंगे बिल और आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी न होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अंधेरा छाया है और गांवों में लगातार तीन-चार दिन से बल्ब नहीं जल रहे हैं। बिजली व्यवस्था की देखभाल करने वाला कोई नहीं दिख रहा।
पटवारी के आरोप
पटवारी ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बिजली बिल को लेकर भी निशाना साधा। उनका दावा था कि सिंधिया के महल का बिल गांवों के गरीब घरों के बिल से कम आता है, जबकि गरीब परिवारों को हजारों रुपये के बिल मिल रहे हैं, फिर भी उनके घरों में अंधेरा है।
उन्होंने प्रदेश के बिजली मंत्री पर भी सवाल उठाए और कहा कि मंत्री पिछले पांच महीनों से “लापता” हैं, जिन्हें लोग तस्वीर लेकर ढूंढ रहे हैं। पटवारी ने मुख्यमंत्री से स्थिति की समीक्षा करने और तत्काल सुधार के कदम उठाने की मांग की।
CM यादव का जवाब
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वीकार किया कि बारिश के पैटर्न में अचानक बदलाव और कई इलाकों में धान की रोपाई में देरी के कारण बिजली की मांग बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने दूसरे राज्यों से अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था की है।
CM के मुताबिक, गुजरात की सरदार सरोवर परियोजना से 800 मेगावाट बिजली मिल रही है। इसके अलावा पंजाब और उत्तर प्रदेश से भी अतिरिक्त बिजली ली गई है। उनका कहना है कि इन इंतजामों से एक-दो दिन में स्थिति सामान्य हो जाएगी। गौरतलब है कि अक्टूबर के इस समय में धान की कटाई-रोपाई का काम बिजली मांग बढ़ाने वाला माना जाता है।
