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Hyderabad Cosmoserve Base 1: अंतरिक्ष कचरा हटाने की सुविधा

Dainik R Times
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हैदराबाद में भारत की पहली निजी अंतरिक्ष कचरा हटाने की सुविधा शुरू हुई है। Hyderabad Cosmoserve Base 1 दुनिया में इस तरह की छठी सुविधा है। इसका उद्घाटन गुरुवार को हुआ। यह सुविधा बंद पड़े उपग्रहों को हटाने और उपग्रहों की मरम्मत का काम करेगी।

Hyderabad Cosmoserve Base 1 में क्या-क्या है?

Base 1 में चार प्रमुख इकाइयाँ बनाई गई हैं। पहली, ऑर्बिटल रेंडेज़वस और कैप्चर लैब है। दूसरी, स्पेस रोबोटिक्स इनोवेशन लैब है। तीसरी, उपग्रह जोड़ने के लिए आईएसओ क्लास 8 क्लीन रूम है। चौथी, मिशन सिमुलेशन और कंट्रोल सेंटर है।

कंपनी दो अंतरिक्ष यानों वाली प्रणाली बना रही है। एक बड़ा ऑर्बिटल स्टेशन ईंधन और लॉजिस्टिक्स केंद्र का काम करेगा। छोटे स्वायत्त यान उपग्रहों को पकड़ेंगे, उनकी जाँच करेंगे और मरम्मत करेंगे। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने 6 मिलियन डॉलर की सीड फंडिंग भी जुटाई है।

कंपनी की योजना क्या है?

कॉसमॉसर्व स्पेस के संस्थापक चिरंजीवी फणींद्र ने कहा कि कचरा बड़ी बाधा बन रहा है। हर देश की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षा इससे प्रभावित हो रही है। उन्होंने करीब 15 साल इसरो में काम किया है। कंपनी की स्थापना जून 2025 में हुई थी।

कंपनी 2027 तक तकनीकी प्रदर्शन मिशन पूरे करेगी। इसके बाद 2028 से व्यावसायिक काम शुरू होगा। जुलाई 2026 में कंपनी का पहला पेलोड मिशन एंब्रेस स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 रॉकेट से उड़ा था।

भारत के लिए यह क्यों अहम है?

अंतरिक्ष में कचरा गगनयान और भारत के अंतरिक्ष स्टेशन के लिए भी चुनौती है। यह सुविधा भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी। कंपनी अपने मिशन के करीब 60 फीसदी हिस्से भारत में ही बनाती है। इससे देश के युवाओं के लिए अंतरिक्ष तकनीक में नए मौके खुलेंगे। हैदराबाद पहले से ही भारत के अंतरिक्ष उद्योग का बड़ा केंद्र है।

यूपीएससी मेन्स परीक्षा के नतीजे भी इसी हफ्ते घोषित हुए हैं। चुनाव आयोग ने 6 राज्यों में वोटर लिस्ट सुधार का ऐलान भी इसी हफ्ते किया है।

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