फ्रांस में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन चौथे हफ्ते भी जारी रहे। France Protests शनिवार को देशभर के शहरों में हुए। गृह मंत्रालय के अनुसार 1,46,000 लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें 46,000 लोग पेरिस में सड़कों पर उतरे। मजदूर संगठनों ने यह संख्या 2,50,000 बताई है। पेरिस में प्रदर्शन के आखिर में झड़पें भी हुईं।
पेरिस में पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पटाखे और पत्थर फेंके थे। पुलिस के अनुसार 200 लोगों ने अधिकारियों पर हमला किया। यह हमला उस समय हुआ जब पुलिस एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर रही थी। उस व्यक्ति ने कूड़ेदान में आग लगाई थी। लियोन में भी पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी। वहां कुछ सौ लोग सड़क जाम करके बैठे थे।
France Protests: 2,700 हिरासत में, 217 को सजा
शनिवार को करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया। न्याय मंत्री जेराल्ड डारमैनिन ने आंकड़े जारी किए हैं। 17 अक्टूबर की हिंसा के बाद से अब तक 2,700 से ज्यादा लोग हिरासत में लिए जा चुके हैं। इनमें 217 लोगों को सजा हो चुकी है। करीब 1,000 लोगों पर मुकदमा चल रहा है। आंदोलन के समन्वयक बेंजामिन बॉल और प्रवक्ता अजेल्मा सिगो भी गिरफ्तार लोगों में शामिल हैं। शनिवार को देशभर में 70,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा के लिए कट्टर वामपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने इन समूहों को देशद्रोही बताया है। गुरुवार के प्रदर्शनों पर पेरिस, लियोन, लिली और ग्रेनोबल में रोक लगा दी गई है। पेरिस में रात का कर्फ्यू सोमवार तक बढ़ा दिया गया है। हालांकि प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। क्योंकि महंगाई लगातार बढ़ रही है, इसलिए लोग सड़कों पर उतर रहे हैं।
आगे क्या होगा
प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू सोमवार को मजदूर संगठनों से मिलेंगे। इस बैठक में वेतन और क्रय शक्ति पर बात होगी। छात्र और शिक्षक संगठनों ने मंगलवार 10 नवंबर को हड़ताल का आह्वान किया है। वे शिक्षा पर ज्यादा खर्च की मांग कर रहे हैं। इसके बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस घोषणा नहीं हुई है। लेकिन प्रदर्शन का यह दौर अभी थमता नहीं दिख रहा है।
केशम द्वीप पर हमला भी हाल में सुर्खियों में रहा था। Stephen Miller बने चीफ ऑफ स्टाफ की खबर भी दुनिया भर में चर्चा में रही। इस खबर की विस्तृत जानकारी डॉन की रिपोर्ट में पढ़ी जा सकती है।
