प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार Diwali Bastar के जवानों के साथ मनाएंगे। उन्होंने रविवार सुबह सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वे जवानों के बलिदान और सेवा को नमन करने जा रहे हैं। बस्तर कभी नक्सलवाद का गढ़ माना जाता था। अब वहां विकास की रफ्तार बढ़ रही है। इसलिए प्रधानमंत्री का यह दौरा खास माना जा रहा है।
मोदी ने अपने संदेश में कहा कि बस्तर वह इलाका है जहां कभी नक्सलियों का असर था। हालांकि अब वहां विकास की बहार है। उन्होंने कहा कि वे वीर जवानों के बलिदान, त्याग और तपस्या को नमन करने जा रहे हैं। बस्तर में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवान तैनात हैं। ये जवान लंबे समय से इस इलाके में सेवा दे रहे हैं।
Diwali Bastar में क्यों खास है
बस्तर दशकों तक देश के सबसे कठिन सुरक्षा इलाकों में गिना जाता था। केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 को देश को नक्सलवाद से मुक्त घोषित किया था। इसके बाद बस्तर में करीब 200 सुरक्षा शिविर बनाए गए हैं। ये शिविर बस्तर के सात जिलों में फैले हुए हैं। सुरक्षा के साथ-साथ वहां सड़क, बिजली और स्कूलों का काम भी तेज हुआ है। इसलिए इस बार की दिवाली बस्तर के लिए अलग मायने रखती है।
प्रधानमंत्री ने शनिवार को देशवासियों को दिवाली की शुभकामनाएं भी दी थीं। उन्होंने अपने वीडियो संदेश में कहा था कि वे हर साल जवानों के साथ दिवाली मनाते हैं। इस बार भी यह परंपरा जारी रहेगी। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री सुबह बस्तर के लिए रवाना हुए। वहां वे जवानों से मिलेंगे और उनके साथ समय बिताएंगे।
2014 से चली आ रही परंपरा
प्रधानमंत्री मोदी 2014 से हर साल दिवाली जवानों के साथ मनाते आ रहे हैं। इसकी शुरुआत सियाचिन बेस कैंप से हुई थी। इसके बाद वे सीमा, नियंत्रण रेखा और नौसैनिक ठिकानों पर जवानों के बीच गए। 2024 में वे कच्छ में भारत-पाक सीमा के पास जवानों के साथ थे। लेकिन इस बार उन्होंने बस्तर को चुना है। क्योंकि बस्तर नक्सलवाद से उबरकर विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।
इससे पहले अयोध्या दीपोत्सव में 36 लाख से ज्यादा दीये जलाए गए थे। शेयर बाजार में दिवाली से पहले बड़ी तेजी दर्ज की गई थी। हालांकि बस्तर का दौरा इन सबसे अलग है। यह दौरा सुरक्षा और विकास दोनों का संदेश देता है। आने वाले घंटों में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की और जानकारी सामने आएगी।
