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किताब में बड़ा दावा: BJP चाहती थी वाजपेयी को राष्ट्रपति बनाना, अटल ने ठुकराया प्रस्ताव

किताब में बड़ा दावा: BJP चाहती थी वाजपेयी को राष्ट्रपति बनाना, अटल ने ठुकराया प्रस्ताव

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के मीडिया सलाहकार रहे अशोक टंडन की किताब ‘अटल संस्मरण’ ने भारतीय राजनीति से जुड़ा एक अहम और चौंकाने वाला खुलासा किया है। किताब के मुताबिक, वर्ष 2002 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राष्ट्रपति पद के लिए अटल बिहारी वाजपेयी का नाम प्रस्तावित किया था, जबकि प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी लालकृष्ण आडवाणी को सौंपने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, वाजपेयी ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था।

अशोक टंडन ने अपनी किताब में लिखा है कि वाजपेयी का मानना था कि किसी लोकप्रिय और बहुमत वाले प्रधानमंत्री का राष्ट्रपति बनना भारतीय संसदीय लोकतंत्र के लिए सही संकेत नहीं होगा। उन्होंने इसे एक “गलत परंपरा” बताते हुए साफ कहा कि वे ऐसे किसी कदम का समर्थन नहीं कर सकते।

लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोपरि रखा

किताब के अनुसार, वाजपेयी का विचार था कि राष्ट्रपति पद एक संवैधानिक और गरिमामय भूमिका है, जिसे राजनीतिक बहुमत के दबाव में नहीं भरा जाना चाहिए। अगर कोई सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री सीधे राष्ट्रपति बनता है, तो इससे लोकतांत्रिक संतुलन बिगड़ सकता है। यही कारण था कि उन्होंने अपनी ही पार्टी के प्रस्ताव को विनम्रता लेकिन दृढ़ता के साथ अस्वीकार कर दिया।

कलाम के नाम पर बनी आम सहमति

अशोक टंडन लिखते हैं कि वाजपेयी ने राष्ट्रपति पद के लिए सर्वसम्मति बनाने की दिशा में पहल की। उन्होंने विपक्ष की प्रमुख पार्टी कांग्रेस के नेताओं को आमंत्रित किया ताकि एक ऐसा नाम सामने आए, जिस पर पूरे देश की सहमति हो सके।

टंडन के अनुसार, उस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, वरिष्ठ नेता प्रणब मुखर्जी और डॉ. मनमोहन सिंह मौजूद थे। वाजपेयी ने पहली बार औपचारिक रूप से बताया कि एनडीए ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने का फैसला किया है।

बैठक में छाया सन्नाटा

किताब में उस ऐतिहासिक पल का भी जिक्र है जब बैठक में कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया था। इसके बाद सोनिया गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे इस प्रस्ताव से हैरान हैं, लेकिन उनके पास डॉ. कलाम के नाम का समर्थन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस इस प्रस्ताव पर विचार करेगी और फिर अंतिम फैसला लेगी।

2002 में बने 11वें राष्ट्रपति

गौरतलब है कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को 2002 में सत्ताधारी एनडीए और विपक्ष दोनों का समर्थन मिला और वे भारत के 11वें राष्ट्रपति बने। उन्होंने 2007 तक राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी निभाई और जनता के बीच “जनता के राष्ट्रपति” के रूप में विशेष पहचान बनाई।

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