शनिवार शाम Azam Khan arrest की खबर ने उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी। ED की लखनऊ जोन की टीम जेल के बाहर पहले से मौजूद थी। उन्होंने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता को रिहाई के कुछ ही मिनट बाद गिरफ्तार कर लिया। आजम खान को आज गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया जाएगा। ED उनसे हिरासत में पूछताछ के लिए रिमांड मांगेगी।
Azam Khan arrest के बाद क्या हुआ
आजम खान शनिवार शाम करीब साढ़े सात बजे रामपुर जेल से बाहर निकले। जेल के बाहर उन्होंने पत्रकारों से कहा कि मुसलमान होने की सजा मिल रही है। उन्होंने कहा कि एक मुसलमान ने विश्वविद्यालय बनाया, यही उनका अपराध है। इसके बाद ED के अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की और फिर उन्हें हिरासत में ले लिया।
आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम खान भी उसी दिन जेल से छूटे थे। वे अपने घर लौट गए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को दोहरे पैन कार्ड मामले में जमानत दी थी। अदालत ने दोनों की सजा पर रोक लगा दी थी। हालांकि यह राहत ED के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लागू नहीं होती थी।
आजम खान नवंबर 2025 से रामपुर जेल में बंद थे। उनकी रिहाई करीब 11 महीने बाद हुई थी।
जौहर विश्वविद्यालय से जुड़ा है मामला
ED का मामला मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़ा है। एजेंसी का आरोप है कि सरकारी योजनाओं का पैसा निजी विश्वविद्यालय के निर्माण में लगाया गया। इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की 58 एफआईआर के आधार पर ED ने 2019 में मामला दर्ज किया था।
ED ने 28 अक्टूबर को विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों को कुर्क किया था। इनकी किताबी कीमत 426.46 करोड़ रुपये और बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये बताई गई है। एजेंसी का कहना है कि सिर्फ 72.63 करोड़ रुपये का ही वैध स्रोत बताया जा सका। बाकी रकम को अपराध से अर्जित आय माना गया है।
ED ने 19 अगस्त को उत्तर प्रदेश और दिल्ली में दस ठिकानों पर छापे मारे थे। 13 अक्टूबर को एजेंसी के अधिकारियों ने जेल के अंदर ही आजम खान से पूछताछ की थी। ED की जानकारी के आधार पर पुलिस ने उसी दिन नई एफआईआर दर्ज की थी। यह एफआईआर ट्रस्ट और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज हुई थी।
दोहरे पैन कार्ड का मामला क्या है
यह मामला 2019 में भाजपा विधायक आकाश सक्सेना की शिकायत से शुरू हुआ था। इसमें पिता-पुत्र पर अलग-अलग जन्म तिथि वाले दो पैन कार्ड रखने का आरोप है। रामपुर की अदालत ने नवंबर 2025 में दोनों को दोषी ठहराया था। पहले सात साल की सजा मिली थी। बाद में सत्र न्यायालय ने आजम खान की सजा बढ़ाकर दस साल कर दी।
आजम खान उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। वे रामपुर से सांसद भी रह चुके हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद राज्य की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। आज अदालत में पेशी के बाद मामले की अगली दिशा साफ होगी।
