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Bangladesh Garment Crisis: 679 फैक्ट्रियाँ फिर बंद

Dainik R Times
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बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग में वेतन को लेकर जारी विरोध फिर भड़क उठा है। सोमवार को कुछ समय के लिए खुली फैक्ट्रियाँ ताजा झड़पों के बाद फिर बंद हो गईं। ताजा आँकड़ों के अनुसार, करीब 679 फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप हो गया है। मजदूर न्यूनतम मासिक वेतन 30,000 टका करने की माँग कर रहे हैं।

Bangladesh Garment Crisis: 679 फैक्ट्रियाँ बंद, लाखों मजदूर प्रभावित

मजदूरों का कहना है कि मौजूदा न्यूनतम वेतन 12,500 टका से गुजारा नहीं हो रहा है। खाने, मकान, परिवहन और इलाज की लागत तेजी से बढ़ी है। इसलिए वे वेतन को दोगुने से अधिक करने की माँग कर रहे हैं। रविवार को हुए विरोध के दौरान 529 फैक्ट्रियाँ बंद हुई थीं। इससे करीब 9 लाख 87 हजार मजदूर प्रभावित हुए थे। सोमवार को फैक्ट्रियाँ खुलीं, लेकिन दोपहर बाद फिर झड़पें शुरू हो गईं।

ढाका, आशुलिया, गाजीपुर और मीरपुर में मजदूरों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कीं और कुछ फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की। पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आँसू गैस का इस्तेमाल किया। एक पुलिस वाहन में आग लगा दी गई। उद्योग संगठन के अनुसार, करीब 20 से 25 फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ हुई है।

वेतन बोर्ड बना, फिर भी नहीं थमा विरोध

सरकार ने रविवार को छह सदस्यीय वेतन बोर्ड का गठन किया था। बोर्ड मजदूरों की वेतन माँगों की समीक्षा करेगा। श्रम मंत्री आरिफुल हक चौधरी ने मजदूरों से काम पर लौटने की अपील की है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने रविवार को आपात बैठक भी बुलाई थी। इसके बावजूद विरोध थमा नहीं है। उद्योग संगठन ने चेतावनी दी है कि बार-बार बंदी पर ‘काम नहीं, तो वेतन नहीं’ लागू हो सकता है।

निर्यात पर असर, दुनिया के बड़े ब्रांड चिंतित

बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इस उद्योग में करीब 40 लाख लोग काम करते हैं। देश की कुल निर्यात आय का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी उद्योग से आता है। एचएंडएम, ज़ारा, वॉलमार्ट और प्राइमार्क जैसे बड़े ब्रांड यहाँ से कपड़े मँगाते हैं। नवंबर से फरवरी का समय ऑर्डर का सबसे अहम मौसम होता है। इस दौरान सालाना ऑर्डर का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा तय होता है। लगातार बंदी से निर्यात ऑर्डर और डिलीवरी पर असर पड़ने की आशंका है।

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