भोपाल में एक लाख से ज्यादा वोटर डिजिटल मैप से गायब, सोमवार से नागरिकता और मताधिकार की सुनवाई शुरू

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान के तहत एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। शहर में 1 लाख 16 हजार 925 ऐसे मतदाता पाए गए हैं, जिनका पता निर्वाचन आयोग के डिजिटल मैप में दर्ज नहीं है। यानी सरकारी रिकॉर्ड में नाम मौजूद है, लेकिन मतदाता फिलहाल कहां रह रहा है, इसकी सटीक डिजिटल मैपिंग नहीं हो पा रही है।
इन्हीं नो-मैपिंग वोटर्स की सुनवाई सोमवार से शुरू कर दी गई है। अगर आप भी इस सूची में शामिल हैं और समय रहते अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं करते, तो आपका मताधिकार खतरे में पड़ सकता है।
85 वार्डों में एक साथ सुनवाई शुरू
सोमवार सुबह से भोपाल के सभी 85 वार्ड कार्यालयों, तहसील कार्यालयों और नजूल दफ्तरों में सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) इन मतदाताओं की सुनवाई कर रहे हैं। जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, अब तक 50 हजार से ज्यादा मतदाताओं को उनके घरों पर नोटिस भेजे जा चुके हैं।
इसके साथ ही, बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) घर-घर जाकर नोटिस बांट रहे हैं, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न हो।
4.38 लाख नाम पहले ही हट चुके
जिला प्रशासन ने बताया कि मतदाता सूची के शुद्धिकरण के दौरान अब तक 4.38 लाख फर्जी या अपात्र नाम सूची से हटाए जा चुके हैं। इनमें मृतक, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अपात्र मतदाताओं के नाम शामिल हैं।
प्रशासन का साफ कहना है कि अगर किसी मतदाता को नोटिस मिलने के बाद भी वह सुनवाई में उपस्थित नहीं होता है, तो अगले चुनाव में उसका नाम वोटर लिस्ट में नहीं मिलेगा। ऐसे में पोलिंग बूथ पर पहुंचने के बाद भी वोट डालने का अधिकार खत्म हो सकता है।
बीएलओ पर दबाव, सर्वर भी बन रहा बाधा
इस अभियान में बीएलओ पर काम का दबाव काफी ज्यादा है। वहीं कई बार डिजिटल सर्वर ठप होने की शिकायत भी सामने आ रही है। इसके बावजूद निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए जरूरी है।
सुनवाई में जाते समय रखें ये दस्तावेज
प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि सुनवाई में पहुंचते समय भारत की नागरिकता और निवास प्रमाणित करने वाले दस्तावेज साथ जरूर रखें। इनमें शामिल हैं—
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आधार कार्ड
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राशन कार्ड
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पासपोर्ट
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बिजली या पानी का बिल
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किरायानामा (यदि किराए पर रहते हैं)
जागरूक नागरिक की जिम्मेदारी
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में नाम बनाए रखना केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी भी है। समय रहते अपने वार्ड कार्यालय या तहसील पहुंचकर दस्तावेज जमा करें, ताकि आपका मताधिकार सुरक्षित रह सके।





