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भोपाल सफाई कर्मचारी हड़ताल: CM से वार्ता की मांग

Dainik R Times
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भोपाल सफाई कर्मचारी हड़ताल के तीसरे दिन भी शहर की हालत नहीं सुधरी है। धनतेरस के दिन राजधानी की सड़कों और बाजारों में कचरे के ढेर लगे हुए हैं। लगभग 15,000 नगर निगम कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहली बार इस मामले पर बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि कर्मचारियों के हित में विचार हो रहा है।

धनतेरस पर कचरे के ढेर

भोपाल में रोजाना करीब 850 टन कचरा निकलता है। हड़ताल के कारण दूसरे दिन भी घरों से कचरा नहीं उठाया गया। शहर के 85 वार्डों और 21 जोनों में सफाई व्यवस्था ठप पड़ी है। पॉश इलाकों में भी सड़कों के किनारे कचरे के ढेर दिख रहे हैं। लोकमत न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, हड़ताल अब सफाई तक सीमित नहीं रही है। जलापूर्ति, अग्निशमन और अन्य विभागों के कर्मचारी भी काम पर नहीं लौटे हैं। नगर निगम के कुल 18,000 कर्मचारियों में से करीब 15,000 हड़ताल में शामिल हैं। यूनियन का दावा है कि प्रदेश भर में करीब ढाई लाख सफाईकर्मी आंदोलन में हैं।

CM ने क्या कहा, क्या हैं मांगें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मामला हित में विचाराधीन है। उन्होंने जल्द समाधान निकलने की संभावना भी जताई है। कर्मचारी नियमितीकरण, 25,000 रुपये मासिक वेतन और ठेका प्रथा खत्म करने की मांग कर रहे हैं। अनुकंपा नियुक्ति देना भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने त्योहार के मौके पर हड़ताल रोकने की अपील की है। आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने बातचीत को सार्थक बताया है। हालांकि यूनियन नेता सीधे मुख्यमंत्री से बातचीत पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद ही कोई फैसला होगा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं।

पानी की सप्लाई पर भी संकट

जलापूर्ति विभाग के कर्मचारियों ने शुक्रवार से पानी की सप्लाई रोकने की चेतावनी दी है। इससे भोपाल के 2.30 लाख नल कनेक्शन प्रभावित हो सकते हैं। कुछ इलाकों में टैंकर से पानी की सप्लाई भी ठप बताई जा रही है। गुरुवार को कर्मचारियों ने नगर निगम मुख्यालय अटल भवन की बिजली काट दी थी। मुख्य द्वार पर ताला लगाकर कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया गया था। शुक्रवार को कमिश्नर के साथ कर्मचारियों की बैठक प्रस्तावित है। इससे पहले हमने भोपाल सफाई कर्मचारी हड़ताल पर पानी संकट की खबर दी थी। गुरुवार को हुई बातचीत विफल रही थी, इसलिए आंदोलन और तेज हो गया। त्योहार के दिनों में हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

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