भोपाल: विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र, 1956 की स्मृतियों से लेकर 2047 के विज़न तक
भोपाल: विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र, 1956 की स्मृतियों से लेकर 2047 के विज़न तक

भोपाल में आज मध्य प्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया गया, जो ऐतिहासिक स्मृतियों और भविष्य की योजनाओं का संगम बनता नजर आया। सत्र की शुरुआत से पहले विधानसभा परिसर में लगाई गई एक विशेष प्रदर्शनी का राज्यपाल द्वारा शुभारंभ किया गया। इस प्रदर्शनी में वर्ष 1956 में गठित मध्य प्रदेश विधानसभा से जुड़ी ऐतिहासिक झलकियों, दस्तावेज़ों और स्मृतियों को प्रदर्शित किया गया, जिसने सदन और प्रदेश के लोकतांत्रिक सफर को जीवंत कर दिया।
सीएम डॉ. मोहन यादव का बयान
विशेष सत्र को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह सत्र सभी पक्षों से विमर्श के बाद आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि 1956 में बनी विधानसभा की स्मृतियां इस विशेष सत्र के माध्यम से फिर से जीवंत हो रही हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह सत्र पूरी तरह सकारात्मक भाव के साथ रखा गया है, ताकि प्रदेश की लोकतांत्रिक यात्रा को सम्मान दिया जा सके।
डॉ. मोहन यादव ने यह भी कहा कि यह विशेष सत्र केवल अतीत को याद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें 2047 के विज़न की झलक भी दिखाई देगी। उन्होंने संकेत दिए कि इस सत्र के माध्यम से मध्य प्रदेश के दीर्घकालिक विकास, सामाजिक संतुलन और आर्थिक प्रगति की दिशा को लघुरूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
(बाइट: सीएम डॉ. मोहन यादव)
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की प्रतिक्रिया
विशेष सत्र को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह सत्र दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के साझा प्रयास से संभव हो सका है। उमंग सिंघार ने कहा कि इस विशेष सत्र का उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि यह चर्चा करना है कि भविष्य का मध्य प्रदेश कैसा बने।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के विकास, युवाओं के अवसर, किसानों की स्थिति और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर गंभीर मंथन जरूरी है। नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, इस तरह के विशेष सत्र लोकतंत्र को मजबूत करते हैं और सत्ता व विपक्ष को एक मंच पर आकर भविष्य की दिशा तय करने का अवसर देते हैं।
(बाइट: नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार)
विशेष सत्र का महत्व
इस एक दिवसीय विशेष सत्र को राजनीतिक सहमति और संवाद का प्रतीक माना जा रहा है। जहां एक ओर यह सत्र मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक यात्रा को याद करता है, वहीं दूसरी ओर आने वाले दशकों की विकास योजनाओं पर सोचने का अवसर भी देता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के सत्र न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करते हैं, बल्कि जनता को यह संदेश भी देते हैं कि प्रदेश का भविष्य साझा सोच और सामूहिक प्रयासों से तय किया जाएगा।





