केंद्रीय जांच ब्यूरो ने फ्यूचर रिटेल लिमिटेड के खिलाफ ₹904.32 करोड़ के कथित बैंक घोटाले का मामला दर्ज किया है। CBI Future Retail Fraud मामले में कंपनी के प्रवर्तक किशोर बियानी भी आरोपी हैं। उनके भाई राकेश बियानी भी आरोपी बनाए गए हैं। सीबीआई ने शुक्रवार को मुंबई में कई ठिकानों पर तलाशी भी ली।
सीबीआई ने यह मामला 4 नवंबर को दर्ज किया था। यह भारतीय स्टेट बैंक की 9 अक्टूबर की शिकायत पर आधारित है। बैंक का आरोप है कि कंपनी ने कर्ज की रकम को गलत तरीके से दूसरी कंपनियों में भेजा। इससे बैंक को ₹904.32 करोड़ का नुकसान हुआ।
शिकायत के अनुसार कंपनी ने नौ बैंकों के समूह से कर्ज की सुविधाएं ली थीं। इनमें कार्यशील पूंजी ऋण, सावधि ऋण और साख पत्र शामिल थे। आरोप है कि यह रकम सहयोगी कंपनियों के जाल से घुमाई गई। सीबीआई का कहना है कि लेनदेन की परतें बनाकर रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया।
मामले में आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी की धाराएं लगाई गई हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। अज्ञात लोक सेवकों और अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। जांच में उनकी भूमिका और रकम के अंतिम इस्तेमाल का पता लगाया जाएगा।
CBI Future Retail Fraud: ऑडिट में क्या सामने आया
बैंक ने फॉरेंसिक ऑडिट में गड़बड़ी का पता लगाया था। यह ऑडिट बीडीओ इंडिया एलएलपी ने किया था। ऑडिट में 1 अप्रैल 2017 से 30 अप्रैल 2022 तक के लेनदेन की जांच हुई। इसके बाद खाते को 26 अप्रैल 2021 से गैर-निष्पादित संपत्ति घोषित किया गया।
बैंक की धोखाधड़ी पहचान समिति ने 23 मार्च 2026 को खाते को धोखाधड़ी वाला घोषित किया। इसके बाद बैंक ने सीबीआई से शिकायत की। तलाशी के दौरान कई दस्तावेज जब्त किए गए हैं। जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोप अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं।
बिग बाजार से फ्यूचर रिटेल तक का सफर
फ्यूचर रिटेल कभी देश की बड़ी खुदरा कंपनियों में गिनी जाती थी। उसके बिग बाजार स्टोर देशभर में मशहूर थे। हालांकि कंपनी पर कर्ज बढ़ता गया और उसका कारोबार संकट में आ गया। शेयर बाजार में भी इस हफ्ते दिवाली से पहले जोरदार तेजी देखी गई।
इस मामले ने बैंकिंग व्यवस्था में कर्ज की निगरानी पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े कर्जों की समय पर जांच जरूरी है। अमेरिका में नौकरियों के ताजा आंकड़े भी इस हफ्ते चर्चा में रहे। सीबीआई का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
