पुणे। भारत की पहली स्वदेशी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) वैक्सीन Cervavac HPV vaccine को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की प्रीक्वालिफिकेशन मिल गई है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) की इस वैक्सीन के लिए यह मील का पत्थर सोमवार, 5 अक्टूबर को हासिल हुआ। यह SII के जैविक उत्पादों की 32वीं WHO प्रीक्वालिफिकेशन है।
WHO की प्रीक्वालिफाइड वैक्सीन सूची में शामिल होने के बाद अब संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां Cervavac की खरीद कर सकेंगी। इसका मतलब है कि भारत में बनी यह वैक्सीन अब दुनियाभर के टीकाकरण कार्यक्रमों तक पहुंचेगी।
Cervavac HPV vaccine क्या है
Cervavac एक रिकॉम्बिनेंट क्वाड्रिवैलेंट HPV वैक्सीन है। यह HPV के 6, 11, 16 और 18 टाइप को निशाना बनाती है। 9 से 26 साल की उम्र के लड़के-लड़कियों के लिए यह वैक्सीन निर्धारित है। लड़कियों और महिलाओं में यह HPV टाइप 16 और 18 से होने वाले सर्वाइकल, वल्वर, वजाइनल और एनल कैंसर से बचाव करती है। वहीं टाइप 6 और 11 से होने वाले जननांग मस्सों से भी सुरक्षा मिलती है।
भारत में ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) पहले ही इसके इस्तेमाल को मंजूरी दे चुका है।
कैसे बनी यह स्वदेशी वैक्सीन
Cervavac को जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) के सहयोग से विकसित किया गया। इसमें WHO की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) और गेट्स फाउंडेशन की भी भागीदारी रही।
SII के CEO अदार पूनावाला ने कहा कि Cervavac की WHO प्रीक्वालिफिकेशन HPV के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। उनके मुताबिक यह उपलब्धि वैक्सीन की प्रभावशीलता को दर्शाती है और देशों को HPV से जुड़े जोखिम रोकने का अवसर देती है।
स्वास्थ्य मानकों पर हाल में FSSAI के आदेश के बाद चर्चा तेज है, और आयुष्मान योजना जैसे कार्यक्रमों के बीच यह वैश्विक उपलब्धि भारत के लिए बड़ी खबर है। यह जानकारी ANI की रिपोर्ट पर आधारित है।
