नई दिल्ली: चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के समर्थन में 124 पूर्व आईएएस, आईएफएस और संबद्ध सेवाओं के अधिकारियों ने शनिवार को देश के नागरिकों के नाम एक खुला पत्र जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि “वोट चोरी” जैसे आरोपों के पीछे ठोस सबूत होने चाहिए, क्योंकि बिना सबूत के लगाए गए आरोप लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा कमजोर करते हैं।
पत्र पर पूर्व विदेश सचिव कनवल सिब्बल समेत कई वरिष्ठ पूर्व अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं। इन अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अपने करियर में चुनाव कराने, मतदाता सूचियां तैयार करने और ईवीएम रखे जाने वाले स्ट्रांग रूम की सुरक्षा का काम देखा है। इसलिए वे चुनाव प्रक्रिया की बारीकियों को अच्छी तरह समझते हैं।
जीते तो ईमानदार, हारे तो धांधली?
पत्र की सबसे तीखी पंक्ति है: “एक व्यवस्था तब ईमानदार नहीं हो सकती जब आप जीतें और धांधली वाली जब आप हारें।” अधिकारियों ने लिखा कि उसी चुनाव आयोग के कार्यकाल में केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी कई राज्यों के विधानसभा चुनाव हारी और 2024 के लोकसभा चुनाव में अपना पूर्ण बहुमत भी खो दिया। इसके बावजूद जीतने वालों ने कोई शिकायत नहीं की।
इसके साथ ही पत्र में आज की चुनाव व्यवस्था की कई सुरक्षा परतों का जिक्र किया गया है — मतदान केंद्रों पर एजेंट, ईवीएम की सीलिंग, स्ट्रांग रूम की सुरक्षा और वीवीपैट सत्यापन। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए पत्र में कहा गया कि वहां पहली बार किसी भी बूथ पर दोबारा मतदान नहीं हुआ और 1951 के बाद सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया, जिसमें महिलाओं की भागीदारी भी रिकॉर्ड स्तर पर रही।
SIR को जरूरी सफाई बताया
अधिकारियों ने SIR को मतदाता सूची दुरुस्त करने की जरूरी प्रक्रिया बताया है। बिहार में हुए पुनरीक्षण में करीब 22 लाख मृत मतदाता और 7 लाख डुप्लीकेट नाम मिले, जबकि 21.5 लाख नए मतदाता जोड़े गए। पत्र का तर्क है कि गलत सूचियों से फर्जी मतदान का खतरा बढ़ता है, इसलिए यह सफाई लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। हालांकि पत्र में यह भी माना गया कि हर बड़े सुधार की तरह इसमें भी कुछ असुविधा हो सकती है।
यह पत्र ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में शनिवार को बड़े प्रदर्शन हुए और [करीब 4,000 लोगों को हिरासत में लिया गया](https://dainikrajeevtimes.com/cjp-protest-evening-4000-detained-monday-protest-oct-10/)। पत्र में लिखा है, “हम किसी पार्टी के नहीं हैं। हम इसलिए लिख रहे हैं क्योंकि ‘धांधली’ शब्द अब बिना सबूत के हमारी चुनावी व्यवस्था पर फेंका जा रहा है।” एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार पत्र में बूथ कैप्चरिंग के उस दौर को भी याद किया गया, जब मतपेटियां लूटी जाती थीं और 1989 में इसे अपराध घोषित किया गया था।
यह भी पढ़ें: [एनडीटीवी की रिपोर्ट](https://www.ndtv.com/india-news/gyanesh-kumar-election-commission-cjp-jantar-mantar-do-you-doubt-system-or-result-124-ex-bureaucrats-diplomats-back-poll-body-12166334?pfrom=home-ndtv_mainnavigation)
