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Journalists Released: पत्रकारों की रिहाई, फोन जब्त

Dainik R Times
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नई दिल्ली। CJP के protest को कवर करने के दौरान शनिवार को हिरासत में लिए गए journalists released Delhi की खबर दोपहर में राहत लेकर आई। Newslaundry और Scroll समेत कई मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को Delhi Police ने सुबह हिरासत में लिया था, लेकिन दोपहर में उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद सभी पत्रकार दोबारा रिपोर्टिंग पर लौट आए हैं।

Newslaundry ने अपने बयान में बताया कि उनके तीन reporters — Ashwine Kumar Singh, Astha Savyasachi और Anmol Pritam — के साथ एक intern Anshu को भी हिरासत में लिया गया था। reporters के अनुसार, उनके official phones जब्त कर लिए गए। जब पत्रकारों ने अपनी press ID दिखाई, तो कथित तौर पर उनसे कहा गया, “कोई मीडिया नहीं है।”

Chhatrasal Stadium ले जाया गया, दोपहर में रिहाई

करीब 30 लोगों को — जिनमें प्रदर्शनकारी और पत्रकार दोनों शामिल थे — एक बस में बैठाकर north Delhi के Chhatrasal Stadium ले जाया गया। reporters ने बताया कि Inspector Dhan Singh Malik ने उनके phones छीने थे। दोपहर में सभी को रिहा कर दिया गया। Newslaundry ने कहा कि उसके reporters वापस लौटकर रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, करीब 15 journalists को Chhatrasal Stadium लाया गया था। Delhi police के सूत्रों ने पुष्टि की है कि Newslaundry और Scroll के पत्रकारों को दोपहर में रिहा कर दिया गया।

Scroll के पत्रकार भी हुए थे हिरासत में

Scroll के investigative reporter Ayush Tiwari को ITO के पास हिरासत में लिया गया था, जबकि वे Jantar Mantar पर भी नहीं थे। उनकी press card साफ दिख रही थी और उन्होंने कई बार बताया कि वे पत्रकार हैं, फिर भी उन्हें वैन में बैठाकर ले जाया गया। बाद में Tiwari ने खुद बताया कि जिस पुलिस बस में वे थे, उसमें लगभग आग लग गई थी। उसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

Scroll के political editor Shoaib Daniyal को CR Park के पास उठा लिया गया, जबकि वे central Delhi में भी नहीं थे। एक वीडियो में वे पुलिस से पूछते सुनाई दे रहे हैं कि उनका अपराध क्या है। The Quint के Sarthak Jaiswal को भी हिरासत में लेकर Chankyapuri police station ले जाया गया था।

वकीलों को CJI का साथ, पत्रकारों को नहीं

Times Now की रिपोर्ट ने इस contrast को उजागर किया है। CJI Surya Kant ने हिरासत में लिए गए Supreme Court lawyers की रिहाई के लिए दखल दिया, लेकिन protest कवर कर रहे journalists को ऐसा कोई सहारा नहीं मिला।

यह मामला press freedom पर सवाल खड़े करता है। प्रेस कार्ड दिखाने के बावजूद पत्रकारों को हिरासत में लेना और उनके official phones जब्त करना लोकतंत्र में गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि, दोपहर की रिहाई के बाद सभी पत्रकार दोबारा मैदान में उतर आए हैं और खबरें दे रहे हैं।

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