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France Protest: Grenade से युवक का हाथ कटा, जांच

Dainik R Times
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France में शनिवार को हुए बड़े प्रदर्शनों के दौरान Saint-Etienne में 17 साल के एक प्रदर्शनकारी का हाथ crowd-control grenade से कट गया। अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है। France protest से जुड़ी इस घटना के बाद पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। Interior Minister Laurent Nunez ने media reports की पुष्टि करने से इनकार किया है कि युवक की चोट police grenade से लगी थी, लेकिन उन्होंने जांच के आदेश दे दिए हैं।

Saturday को France में क्या-क्या हुआ

शनिवार को महंगाई और school conditions के खिलाफ France भर में बड़े प्रदर्शन हुए। Interior Ministry के मुताबिक करीब 550,000 लोग सड़कों पर उतरे, जबकि CGT trade union का दावा है कि यह संख्या 800,000 थी। PM Sebastien Lecornu के अनुसार शनिवार को 1,200 गिरफ्तारियों की गईं और 150 से ज्यादा police अधिकारी घायल हुए। Limoges में 143 साल पुराना city hall आग में तबाह हो गया — local prefect Maurice Barate ने इसे ‘heritage के लिए तबाही’ बताया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक masked protesters ने पहले town hall के बाहर खड़ी police car में आग लगाई, फिर खिड़कियां तोड़कर इमारत में घुस गए। आग ground floor से roof और bell tower तक फैल गई। Lyon में tourist office में लगी आग बुझाने से firefighters को रोका गया, जबकि इससे पहले Lyon और Marseille में हुई हिंसा में कई इमारतों को नुकसान पहुंचा था। Paris में कई दुकानों में लूटपाट हुई।

पुलिस की भूमिका पर सवाल

Saint-Etienne की घटना ने France में police की crowd-control रणनीति पर बहस तेज कर दी है। Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार authorities ने युवक के गंभीर रूप से घायल होने के बाद जांच शुरू की है। गौरतलब है कि इससे पहले 5 अक्टूबर को Lens में भी एक 15 साल के लड़के का हाथ stun grenade से कट गया था, जिसके बाद Interior Minister ने high-school प्रदर्शनों में एक तरह के stun grenade के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। हालांकि यह रोक शनिवार जैसे अन्य प्रदर्शनों पर लागू नहीं होती। Rights groups का आरोप है कि युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ police excessive force का इस्तेमाल कर रही है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि कुछ प्रदर्शनों में बढ़ती हिंसा के जवाब में कार्रवाई की जा रही है। France में अगले साल presidential election होने हैं, और यह आंदोलन राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है।

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