केंद्रीय मंत्री Hardeep Puri Rajya Sabha के लिए मध्य प्रदेश से निर्विरोध चुने गए। गुरुवार को नाम वापसी की समय सीमा खत्म होते ही उनका निर्वाचन तय हो गया। दो अन्य उम्मीदवारों के नामांकन खारिज हो चुके थे। इसलिए मैदान में सिर्फ वही बचे थे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उनका निर्वाचन प्रमाण पत्र लिया। यह प्रमाण पत्र विधानसभा में निर्वाचन अधिकारी उमेश कुमार शर्मा से मिला। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार प्रमाण पत्र गुरुवार को ही सौंपा गया।
Hardeep Puri Rajya Sabha चुनाव की प्रक्रिया
पुरी ने 31 अक्टूबर को भोपाल में नामांकन भरा था। उस समय मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और जगदीश देवड़ा भी साथ थे। इसके बाद 3 नवंबर को जांच में उनका नामांकन स्वीकार हुआ। कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों की आपत्तियां खारिज कर दी गईं। राजकुमार लोहानी का नामांकन फॉर्म 26 न देने पर खारिज हुआ। कांते सयन्ना का नामांकन भी खारिज कर दिया गया।
यह सीट एल मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई थी। मुरुगन ने 14 अक्टूबर को इस्तीफा दिया था। वह केंद्रीय राज्य मंत्री भी थे। उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 को खत्म होना था। अब पुरी उसी कार्यकाल का बचा हुआ हिस्सा पूरा करेंगे।
मुख्यमंत्री ने दी बधाई
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पुरी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह मध्य प्रदेश के लिए गर्व की बात है। पुरी केंद्र सरकार में पेट्रोलियम मंत्री हैं। वह पहले भी राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। अब वह फिर से उच्च सदन में प्रदेश का पक्ष रखेंगे।
भाजपा के लिए क्या मायने
भाजपा के लिए यह जीत बिना मतदान के मिली। पार्टी ने पुरी को अपना उम्मीदवार बनाया था। मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है। इसलिए निर्विरोध चुनाव की संभावना पहले से ही जताई जा रही थी। अब पुरी का ध्यान संसद में सरकार के काम पर रहेगा। हाल ही में मध्य प्रदेश में 8 IPS अफसरों के प्रभार बदले गए थे। इससे पहले युवा कांग्रेस के 60 पदाधिकारी सस्पेंड किए गए थे।
