संयुक्त राष्ट्र ने International Court of Justice (ICJ) के लिए पांच नए जज चुने हैं। यह चुनाव मंगलवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुआ था। चुने गए जजों का नौ साल का कार्यकाल 6 फरवरी 2027 से शुरू होगा। यह कार्यकाल 5 फरवरी 2036 तक चलेगा। चुनाव में नौ उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें से पांच को महासभा और सुरक्षा परिषद दोनों से बहुमत मिला।
ICJ Judges Election में कौन-कौन चुने गए
ब्रिटेन के डापो अकांडे और फ्रांस के फ्रांस्वा अलाब्रून चुने गए हैं। जॉर्डन के महमूद दैफल्लाह हमूद, सिंगापुर की रेना ली और केन्या की फोबी ओकोवा भी चुनी गई हैं। इनमें से चार उम्मीदवार पहले दौर में ही चुन लिए गए थे। पांचवीं सीट के लिए तीसरे दौर तक मतदान चला। केन्या की ओकोवा ने इस सीट पर जीत दर्ज की। उन्हें महासभा में 183 वोट और सुरक्षा परिषद में 13 वोट मिले।
ओकोवा की जीत से पहले इक्वाडोर के मार्सेलो वास्केज-बर्मूडेज ने अपना नाम वापस ले लिया था। उन्हें सुरक्षा परिषद का समर्थन मिला था, लेकिन महासभा में बहुमत नहीं मिला था। इसके बाद ओकोवा के सामने पेरू की लूज डेल कार्मेन इबानेज कारांजा रह गई थीं। अंतिम मतदान में उन्हें सिर्फ दो वोट मिले, जबकि छह देशों ने मतदान से दूरी बनाई।
दो जजों को दोबारा चुना गया
जॉर्डन के हमूद और केन्या की ओकोवा पहले से ही अदालत में जज के रूप में काम कर रही हैं। दोनों को 2025 में खाली सीटों पर चुना गया था। उनका मौजूदा कार्यकाल 5 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है। अब दोनों को पूरे नौ साल का कार्यकाल मिला है। ओकोवा ने 2025 में सोमालिया के जज अब्दुलकावी यूसुफ के इस्तीफे से खाली हुई सीट भरी थी।
फ्रांस के रोनी अब्राहम का कार्यकाल भी 5 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है। भारत के दलवीर भंडारी और ब्राजील के लियोनार्डो ब्रांट का कार्यकाल भी उसी दिन खत्म होगा। इसी वजह से पांच सीटों पर चुनाव कराया गया था। अकांडे ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर हैं। रेना ली सिंगापुर की अंतरराष्ट्रीय कानून मामलों की राजदूत हैं।
रिकॉर्ड मामलों के बीच ICJ की भूमिका
ICJ संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है। इसमें कुल 15 जज होते हैं। हर तीन साल में एक तिहाई सदस्यों का चुनाव होता है। अदालत का मुख्यालय नीदरलैंड के हेग शहर में है। इस समय अदालत के सामने रिकॉर्ड संख्या में मामले लंबित हैं। इनमें गाजा को लेकर दक्षिण अफ्रीका का इजरायल के खिलाफ नरसंहार का मामला भी शामिल है।
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव गुप्त मतदान से हुआ था। महासभा और सुरक्षा परिषद ने अलग-अलग मतदान किया था। किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए दोनों निकायों में पूर्ण बहुमत जरूरी था। नए जजों के आने से अदालत की संरचना अगले नौ साल के लिए तय हो गई है।
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