UNSC स्थायी सदस्य में भारत की एंट्री: क्या पाकिस्तान बनेगा राह में रोड़ा?
UNSC स्थायी सदस्य में भारत की एंट्री: क्या पाकिस्तान बनेगा राह में रोड़ा?

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता के लिए प्रयासरत है। देश की बढ़ती वैश्विक भूमिका, आर्थिक ताकत और सैन्य क्षमताओं के कारण भारत की स्थायी सदस्यता को कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने समर्थन दिया है। इसके बावजूद, कुछ देशों ने भारत की इस महत्वाकांक्षी कोशिश में प्रतिरोध किया है, और पाकिस्तान इसमें सबसे बड़ा रोड़ा बनकर उभरता दिखाई दे रहा है।
पाकिस्तान, जो भारत के साथ लंबे समय से राजनीतिक और भू-रणनीतिक संघर्ष में रहा है, ने अक्सर भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को चुनौती देने की रणनीति अपनाई है। UNSC की स्थायी सदस्यता में भारत के प्रवेश के मार्ग में पाकिस्तान कई बार विरोध दर्ज करवा चुका है। पाकिस्तान का यह रवैया कई बार “आस्तीन का सांप” कहा गया है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह देश अक्सर भारत के विरोध में खड़ा होता है, जबकि कई बार वह खुद अंतरराष्ट्रीय सहयोग और शांति प्रक्रिया में हिस्सेदारी का दिखावा करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन की आवश्यकता होती है, जिसमें पांच स्थायी सदस्य देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन) की सहमति जरूरी होती है। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती चीन और पाकिस्तान का विरोध है। चीन, जो पिछले कुछ दशकों में भारत के पड़ोसी देशों के साथ विभिन्न विवादों में शामिल रहा है, भारत की सदस्यता को लेकर अक्सर विरोध करता रहा है। वहीं, पाकिस्तान सक्रिय रूप से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ अभियान चलाता है, जो कि UNSC की सदस्यता प्रक्रिया में बाधक साबित हो सकता है।
भारत ने अपने हितों और वैश्विक नेतृत्व की जरूरत को ध्यान में रखते हुए सभी समर्थक देशों के साथ कूटनीतिक संबंध मजबूत किए हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और यूरोपीय संघ जैसे देशों ने भारत की सदस्यता का समर्थन किया है। इसके अलावा, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई देशों ने भी भारत को स्थायी सदस्य बनाने का समर्थन किया है।

UNSC में स्थायी सदस्य बनने से भारत को वैश्विक सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिलेगा। स्थायी सदस्यता के जरिए भारत को वेटो अधिकार, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के फैसलों में शामिल होने का मौका मिलेगा। इसके साथ ही यह दक्षिण एशिया में भारत की भू-राजनीतिक स्थिति को भी मजबूत करेगा।
हालांकि, पाकिस्तान के विरोध और चीन की भूमिका भारत के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। भारत को कूटनीतिक प्रयासों को तेज करने, मित्र देशों के समर्थन को सुदृढ़ करने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने रजत स्थान को और स्पष्ट करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस प्रक्रिया में समय लगेगा, लेकिन भारत की वैश्विक ताकत और कूटनीतिक अनुभव इसे सफल बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
कुल मिलाकर, UNSC की स्थायी सदस्यता भारत के लिए सिर्फ सम्मान का विषय नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और रणनीतिक नेतृत्व में भारत की हिस्सेदारी का प्रतीक भी होगी। पाकिस्तान का विरोध और चीन का रवैया चुनौतीपूर्ण है, लेकिन भारत की मजबूत कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय समर्थन इसे हासिल करने में मददगार साबित होंगे।



