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इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी का खौफ, 15 मौतों के बाद भी टैंकर के पानी पर भरोसा नहीं कर रहे लोग

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब तक इस इलाके में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग बीमार होकर अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। लगातार बढ़ते मौत के आंकड़े और नए मरीजों के सामने आने से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि लोग अब नगर निगम के टैंकर से आने वाले पानी पर भी भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। हालात यह हैं कि टैंकर से मिलने वाले पानी को भी लोग सीधे इस्तेमाल नहीं कर रहे, बल्कि पहले उसे उबालकर उपयोग में ला रहे हैं। कई परिवारों ने तो सुरक्षा के लिहाज़ से बाहर से मिनरल वॉटर के कैन मंगवाकर पीना शुरू कर दिया है

🚰 टैंकर से पानी, फिर भी डर बरकरार

नगर निगम द्वारा भागीरथपुरा के अलग-अलग इलाकों में रोज़ाना स्वच्छ पानी की सप्लाई के लिए टैंकर भेजे जा रहे हैं। निगम का दावा है कि यह पानी पूरी तरह सुरक्षित है। बावजूद इसके, क्षेत्रवासियों का डर खत्म नहीं हो पा रहा। लोगों का कहना है कि जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं होती और स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक वे किसी भी सप्लाई के पानी पर भरोसा नहीं करेंगे।

🦠 जांच रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

पानी की जांच रिपोर्ट ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। नर्मदा पाइपलाइन से सप्लाई होने वाले पानी में ई-कोलाई और शिगेला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, ये बैक्टीरिया आमतौर पर मानव मल में पाए जाते हैं। इससे यह साफ हो गया है कि ड्रेनेज लाइन का पानी नर्मदा पाइपलाइन में मिल रहा था

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बैक्टीरिया पेट में गंभीर संक्रमण, उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन और जानलेवा स्थितियां पैदा कर सकते हैं। यही वजह है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े और कई की जान चली गई।

🏥 अस्पतालों में मरीजों का दबाव

इलाके के कई सरकारी और निजी अस्पतालों में दूषित पानी से बीमार मरीजों का इलाज चल रहा है। डॉक्टरों की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को उबला हुआ पानी पीने और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है।

❗ लोगों की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि

  • दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए

  • पाइपलाइन और ड्रेनेज सिस्टम की पूरी जांच हो

  • स्थायी रूप से सुरक्षित पेयजल व्यवस्था की जाए

  • पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाए

“सबसे स्वच्छ शहर” कहलाने वाले इंदौर में इस तरह की जल त्रासदी ने नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं

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