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इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 17वीं मौत, बच्चों पर भी खतरा, AIIMS–ICMR की टीम अलर्ट, पीड़ित परिवारों पर दोहरी मार

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। रविवार को इस कड़ी में एक और नाम जुड़ गया। 69 वर्षीय रिटायर्ड पुलिसकर्मी ओमप्रकाश शर्मा ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उन्हें एक जनवरी को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर दो जनवरी को आईसीयू में शिफ्ट किया गया और बाद में वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन रविवार दोपहर एक बजे उनकी मौत हो गई।

बच्चों पर भी मंडरा रहा खतरा

दूषित पानी का असर अब बच्चों तक पहुंच गया है। चाचा नेहरू अस्पताल में करीब 12 बच्चों का इलाज चल रहा है। इनमें उल्टी, दस्त और बुखार जैसे लक्षण पाए गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रविवार को AIIMS और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की संयुक्त टीम अस्पताल पहुंची। टीम ने बच्चों की हालत का जायजा लिया और उनकी ब्लड कल्चर रिपोर्ट, स्टूल जांच रिपोर्ट तथा दी जा रही दवाओं की जानकारी एकत्र की।

डॉक्टरों के अनुसार, रविवार को हालत में सुधार के बाद तीन बच्चों को डिस्चार्ज किया गया है, जबकि बाकी बच्चों की निगरानी जारी है। मेडिकल टीम आने वाले दिनों में बीमारी के कारणों और संक्रमण के स्रोत की गहराई से जांच करेगी।

भागीरथपुरा के परिवारों पर गहराता संकट

दूषित पानी कांड के बाद भागीरथपुरा के कई परिवारों पर आर्थिक और मानसिक संकट भी गहराता जा रहा है। 28 वर्षीय अमित मेर, जो पोलो ग्राउंड स्थित एक ऑटोमोबाइल फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं, 28 दिसंबर से काम पर नहीं जा पाए हैं। उनकी 50 वर्षीय मां रामकली की दूषित पानी पीने से मौत हो गई।

अमित बताते हैं कि वह रोज करीब 400 रुपये की दिहाड़ी पर काम करते थे। मां की मौत के बाद न तो वह काम पर जा पा रहे हैं और न ही घर में कोई कमाने वाला बचा है। ऐसे कई परिवार हैं, जिनकी रोजी-रोटी बीमारी और मौत के कारण ठप हो गई है।

पीड़ितों पर दोहरी मार

भागीरथपुरा में अधिकतर लोग दिहाड़ी मजदूर, स्ट्रीट वेंडर और छोटे कामगार हैं। रोज कमाकर रोज खाने वालों के लिए यह संकट दोहरी मार बन गया है—एक तरफ इलाज का खर्च, दूसरी तरफ काम बंद होने से आमदनी खत्म।

इलाज में लापरवाही के आरोप

स्थानीय निवासी बीना सावरिया ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि उनके पति प्रकाश प्रजापति को तबीयत खराब होने पर आरोग्य केंद्र ले जाया गया था। डॉक्टर ने पांच दवाइयां लिखीं, लेकिन चार दवाइयां देकर भेज दिया गया। यह नहीं बताया गया कि एक जरूरी दवाई उपलब्ध नहीं है।

तीन दिन तक दवा खाने के बाद भी जब आराम नहीं मिला, तो मेडिकल स्टोर पर पता चला कि सबसे अहम दवाई तो ली ही नहीं गई थी। इसके बाद दवा लेने पर तबीयत में सुधार हुआ।

कर्ज लेकर RO लगाने की मजबूरी

बीना सावरिया का कहना है कि अब उन्हें RO का पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। घर में छोटे बच्चे हैं और निगम के टैंकर या नर्मदा जल पर भरोसा नहीं रहा। उन्होंने कहा, “अब कर्ज लेकर घर में RO लगवाएंगे, क्योंकि जल ही जीवन है। यहां का पानी जहर बन चुका है।”

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