इंदौर में पेयजल बना जानलेवा, दूषित पानी से 14 की मौत, सरकारी रिपोर्ट ने खोली नगर निगम की पोल

इंदौर | दूषित पानी ने छीनी 14 जिंदगियां, सरकारी रिपोर्ट ने लगाई मुहर
देश के सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा कई बार हासिल कर चुके इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 1400 लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इस मामले में अब स्वास्थ्य विभाग की सरकारी रिपोर्ट सामने आ गई है, जिसने साफ तौर पर पुष्टि कर दी है कि मौतों और बीमारियों की वजह दूषित पेयजल ही है।
🔬 सरकारी जांच में चौंकाने वाला खुलासा
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी ने बताया कि महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की लैब में पानी के नमूनों की जांच की गई थी। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से सामने आया है कि पानी में खतरनाक बैक्टीरिया मौजूद थे, जो सीधे तौर पर मानव जीवन के लिए घातक हैं।
डॉ. हसानी के अनुसार, पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवेज का पानी पेयजल लाइन में मिल गया, जिससे यह भयावह स्थिति बनी। उन्होंने कहा कि लीकेज किस स्तर और किस स्थान पर हुआ, इसकी विस्तृत जानकारी संबंधित तकनीकी विभाग द्वारा दी जाएगी।
🏛️ मंत्री और सांसद ने भी मानी लापरवाही
इस गंभीर मामले पर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी स्वीकार किया कि भागीरथपुरा में सीवेज पानी का पेयजल में मिलना ही इस त्रासदी का मुख्य कारण है। उन्होंने आशंका जताई कि चौकी के पास स्थित पाइपलाइन लीकेज पॉइंट हो सकता है, जहां से गंदा पानी सप्लाई लाइन में घुला।
वहीं, इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पानी के नमूनों में ऐसे जानलेवा बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो सीधे तौर पर मौत का कारण बन सकते हैं। उन्होंने इसे नगर निगम और संबंधित विभागों की गंभीर लापरवाही करार दिया।
🚑 1400 से ज्यादा लोग बीमार
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से बड़ी संख्या में लोग उल्टी, दस्त, बुखार और पेट दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। अब तक करीब 1400 लोग संक्रमण का शिकार हो चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इलाके में मेडिकल कैंप लगाए गए हैं और लोगों को उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी जा रही है।
🔧 पाइपलाइन मरम्मत का काम जारी
प्रशासन के अनुसार, चौकी के पास बने शौचालय के नीचे से गुजर रही पाइपलाइन में लीकेज पाया गया है। फिलहाल मरम्मत कार्य जारी है और प्रभावित क्षेत्र में वैकल्पिक जल व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन का दावा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
यह घटना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी बताती है कि स्वच्छता के तमगे के बावजूद पेयजल सुरक्षा में बड़ी चूक हुई है।





