मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इंदौर-देवास बायपास की जर्जर हालत पर कड़ा रुख अपनाया है। Indore-Dewas Bypass के गड्ढों और खराब रखरखाव पर कोर्ट सख्त है। कोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को तलब किया है। अधिकारी को 22 दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना होगा। कोर्ट ने उनसे शिकायतों के समाधान की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।
न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने यह आदेश जारी किया। सुनवाई 28 अक्टूबर को हुई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है जैसे NHAI असली हालत से बच रहा है। कोर्ट ने चार पेज के आदेश में अधिकारी को निर्देश दिए हैं। उन्हें बताना होगा कि भविष्य में सड़क का रखरखाव किस तरह किया जाएगा।
यह मामला MAATR फाउंडेशन की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में कहा गया है कि बायपास पर जगह-जगह गहरे गड्ढे हो गए हैं। सड़क असमतल और फिसलन भरी हो गई है। जलभराव, जाम नालियां और खराब दृश्यता से हादसों का खतरा बढ़ गया है। पुलों और पुलियाओं में दरारें आ चुकी हैं। सर्विस रोड और अंडरपास की हालत भी बेहद खराब है। फ्री प्रेस जर्नल के अनुसार याचिका में टोल वसूली पर तुरंत रोक की मांग भी की गई थी।
Indore-Dewas Bypass: टोल वसूली पर फिलहाल रोक नहीं
कोर्ट ने टोल वसूली पर फिलहाल कोई रोक नहीं लगाई है। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि उचित रखरखाव सुनिश्चित होने तक टोल वसूली रोक दी जाए। कोर्ट ने इस मांग पर तत्काल कोई आदेश जारी नहीं किया। हालांकि अधिकारी को अगली सुनवाई तक की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट पेश करनी होगी।
NHAI की ओर से कहा गया है कि बायपास के गड्ढे भर दिए गए हैं। सुधार का काम जारी है। कोर्ट ने अधिकारी से यह भी पूछा है कि भविष्य में रखरखाव की ठोस कार्ययोजना क्या होगी। अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होगी।
इंदौर में सड़क सुरक्षा पर पहले भी उठे सवाल
इंदौर में सड़क सुरक्षा और रखरखाव का मुद्दा पहले भी सुर्खियों में रहा है। भागीरथपुरा मामले में भी जांच रिपोर्ट को लेकर सवाल उठे थे। मध्य प्रदेश में नए हाईवे और ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का काम भी चल रहा है। लेकिन पुरानी सड़कों के रखरखाव पर लोगों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
बायपास से रोज हजारों वाहन गुजरते हैं। गड्ढों और जलभराव से वाहन चालकों को परेशानी होती है। बरसात के समय खतरा और बढ़ जाता है। कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब NHAI की कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।
