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इंदौर गैस संकट: सराफा चौपाटी की रौनक घटी, इंडक्शन पर बन रहा स्ट्रीट फूड

Dainik R Times
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इंदौर गैस संकट से सराफा चौपाटी और फूड हब्स प्रभावित

इंदौर गैस संकट का असर अब शहर के मशहूर फूड हब्स पर साफ दिखाई देने लगा है। इंदौर गैस संकट के कारण कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित हो गई है, जिससे सराफा चौपाटी और अन्य स्ट्रीट फूड बाजारों की रौनक फीकी पड़ने लगी है।

दरअसल मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईंधन आपूर्ति की बाधाओं के कारण कमर्शियल गैस की उपलब्धता कम हो गई है। वहीं शहर के कई दुकानदार अब गैस के बजाय इंडक्शन चूल्हों और इलेक्ट्रिक ग्रिल का सहारा लेकर कारोबार चला रहे हैं।


सराफा चौपाटी पर बदला खाना बनाने का तरीका

इंदौर गैस संकट के चलते सराफा चौपाटी के कई दुकानदारों को अपने काम करने का तरीका बदलना पड़ा है।

दरअसल जहां पहले गरमागरम भजिए, गराडू और अन्य स्नैक्स गैस पर तले जाते थे, वहीं अब कई दुकानों पर इन्हें इंडक्शन चूल्हों पर तैयार किया जा रहा है। वहीं सैंडविच और अन्य ग्रिल्ड आइटम्स इलेक्ट्रिक ग्रिल में बनाए जा रहे हैं।

दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक आते हैं तो कुछ न कुछ परोसना ही पड़ता है। हालांकि गैस की कमी के कारण काम करना पहले जितना आसान नहीं रहा।

स्थिति के प्रमुख बिंदु:

  • भजिए और पकोड़े इंडक्शन पर बनाए जा रहे

  • सैंडविच इलेक्ट्रिक ग्रिल पर तैयार

  • गैस सिलेंडर की सप्लाई बाधित

  • ग्राहकों की संख्या में कमी

छोटा तथ्य: सराफा बाजार इंदौर का सबसे प्रसिद्ध नाइट फूड मार्केट है।


स्वाद और कारोबार दोनों पर असर

इंदौर गैस संकट का असर केवल व्यवस्था पर ही नहीं बल्कि स्वाद और कारोबार पर भी पड़ा है।

दुकानदारों का कहना है कि इंडक्शन पर भजिए तलने से स्वाद में थोड़ा अंतर आता है। हालांकि फिलहाल इसी व्यवस्था से काम चलाया जा रहा है। वहीं छप्पन दुकान जैसे लोकप्रिय फूड स्पॉट्स पर भी इसी तरह के हालात देखने को मिल रहे हैं।

दूसरी ओर पहले की तुलना में बाजार में भीड़ भी कम दिखाई दे रही है। व्यापारी मानते हैं कि अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो कारोबार पर बड़ा असर पड़ सकता है।


होटल और कैटरिंग सेक्टर पर ज्यादा असर

इसी बीच होटल और कैटरिंग उद्योग को इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित माना जा रहा है।

दरअसल शहर में लगभग 400 कैटरर्स, 100 होटल और 250 से अधिक बड़े रेस्टोरेंट कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर हैं। वहीं करीब 12 हजार छोटे-बड़े खान-पान कारोबारियों का काम भी इसी गैस पर चलता है।

प्रभावित सेक्टर:

  • होटल और रेस्टोरेंट

  • कैटरिंग व्यवसाय

  • स्ट्रीट फूड विक्रेता

  • छोटे उद्योग और वेल्डिंग यूनिट

छोटा तथ्य: इंदौर में हर दिन हजारों सिलेंडर कमर्शियल उपयोग में आते हैं।


इंडक्शन और इलेक्ट्रिक उपकरणों की मांग बढ़ी

इंदौर गैस संकट के बीच बाजार में इलेक्ट्रिक उपकरणों की मांग अचानक बढ़ गई है।

दरअसल इंडक्शन चूल्हे, इलेक्ट्रिक ग्रिल, राइस कुकर और एयर फ्रायर की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। दुकानदारों का कहना है कि पहले जो बिक्री एक महीने में होती थी, वह अब दो से तीन दिन में हो रही है।

इसके अलावा होटल और रेस्टोरेंट संचालक अब पांच से छह किलोवाट क्षमता वाले कमर्शियल इंडक्शन की तलाश कर रहे हैं, ताकि बड़ी मात्रा में खाना तैयार किया जा सके।

मांग बढ़ने के कारण:

  • गैस सिलेंडर की कमी

  • इलेक्ट्रिक उपकरणों का विकल्प

  • होटल और ढाबों की जरूरत

  • ग्रामीण क्षेत्रों से भी खरीदारी

छोटा तथ्य: घरेलू इंडक्शन आमतौर पर 1.5 से 2 किलोवाट क्षमता के होते हैं।


वैकल्पिक ईंधन तलाश रहे व्यापारी

हालांकि व्यापारी अभी भी गैस संकट से निपटने के लिए अलग-अलग विकल्प तलाश रहे हैं।

दरअसल पहले तंदूर, सिगड़ी या डीजल भट्टी का उपयोग किया जाता था, लेकिन स्वच्छता नियमों के कारण इन पर कई जगह प्रतिबंध है। वहीं केरोसिन और डीजल भट्टियों की उपलब्धता भी आसान नहीं है।

दूसरी ओर इंडक्शन या इलेक्ट्रिक उपकरणों के लिए अधिक बिजली कनेक्शन की जरूरत पड़ती है, जिससे छोटे दुकानदारों के लिए यह व्यवस्था भी आसान नहीं है।

इससे पहले इंदौर में घरेलू गैस बुकिंग बढ़ने की खबर भी सामने आई थी।
इस मामले में विस्तृत अपडेट देखें कि शहर में गैस बुकिंग अचानक क्यों बढ़ी।

स्रोत:
अधिक जानकारी के लिए देखें
https://www.petroleum.nic.in

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